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पृष्ठ:सत्यार्थ प्रकाश.pdf/१४७

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। पञ्चमसमुल्लासः ॥ १३५ संगदोषों को छोड़ हर्प शोकादि मव द्वन्द्वों से विमुक्त होकर संन्यासी ब्रह्म ही में अवस्थित होता है संन्यासियों का मुख्य कर्म यही है कि सब गृहस्थादि आश्रमों को सब प्रकार के व्यवहारों का सत्य निश्चय करा अधर्म व्यवहारों से छुड़ा सब संशयों का छेदन कर सत्य धर्मयुक्त व्यवहारों में प्रवृत्त कराया करें । (प्रश्न ) संन्यासग्रहण करना ब्राह्मण ही का धर्म है वा क्षत्रियादि का भी ? ( उत्तर ) ब्राह्मण ही को अधिकार है क्योकि जो सब वर्गों में पूर्ण विद्वान् धार्मिक । परोपकारप्रिय मनुष्य है उसी का ब्राह्मण नाम है विना पूर्ण विद्या के धर्म, परमेश्वर ___ की निष्ठा और वैराग्य के सन्यास ग्रहण करने में संसार का विशेष उपकार नहीं ' हो सकता इमीलिय लोकश्रुति है कि ब्राह्मण को संन्यास का अधिकार है अन्य को · नहीं यह मनु का प्रमाण भी है:- एष वोऽभिहितो धर्मो ब्राह्मणस्य चतुर्विधः । । पुण्योऽचयफलः प्रेत्य राजधर्मान् निबोधत।।मनु०६।६७॥ यह मनुजी महाराज कहत है कि हे ऋषियो ! यह चार प्रकार अर्थात् ब्रह्म- .. चर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और मंन्यासाश्रम करना ब्राह्मण का धर्म है यहां वर्तमान . में पुण्यस्वरूप और शरीर छोड़े पश्चान मुक्तिरूप अक्षय श्रानन्द का देनेवाला संन्यास । धर्म है इसके आगे राजाओं का धर्म मुझ से सुनो । इससे यह सिद्ध हुआ कि संन्यासग्रहण का अधिकार मुख्य करके ब्राह्मण का है और क्षत्रियादि का ब्रह्मचर्या- ' श्रम है ( प्रश्न । संन्यासग्रहण की आवश्यक्ता क्या है ? । उत्तर ) जैसे शरीर में शिर

की आवश्यक्ता वैसे ही आश्रमों मे संन्यासाश्रम की आवश्यक्ता है क्योंकि इसके
विना विद्या धर्म कभी नहीं बढ़ सकता और दूसरे आश्रमों को विद्याग्रहण गृहकृत्य

। और तपश्चर्यादि का सम्बन्ध होने से अवकाश बहुत कम मिलता है। पक्षपात छोड़ | कर वर्तना दूसरे आश्रमों को दुष्कर है जैसा संन्यासी सर्वतोमुक्त होकर जगत् का | उपकार करता है वैसा अन्य आश्रमी नहीं कर सकता क्योंकि सन्यासी को सत्य- । विद्या से पदार्थों के विज्ञान की उन्नति का जितना अवकाश मिलता है उतना अन्य | आश्रमी को नहीं मिल सकता । परन्तु जो ब्रह्मचर्य से संन्यासी होकर जगन् को । सत्य शिक्षा करके जितनी उन्नति कर सकता है, उतनी गहस्थ वा वानप्रस्थ आश्रम करके संन्यासाश्रमी नहीं कर सकता ( प्रश्न ) सन्यास ग्रहण करना ईश्वर के अ- .भिप्राय से विरुद्ध है क्योंकि ईश्वर का अभिप्राय मनुष्यों की बढ़ती करने में है जब Ana