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पृष्ठ:सत्यार्थ प्रकाश.pdf/५१९

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म्योंदासमुला ः ? ५१७ ईश्वर के सब मनुष्य और पशु, पक्षी आदि सब जीव पुत्रवत् हैं । परमेश्वर ऐसा काम कभी नहीं कर सकता, इसी से यह बाइबल ईश्वरलत और म में लिखा ई श्वर और इसके माननेवाले धर्मझ कभी नहीं हो सकतेऐसी ही सब बातें लय व्यवस्था आदि पुस्तकों में भरी हैं कहांतक गिनायें ।॥ ५३ ॥

गिनती की पुस्तक । ५४-खो गदही ने परमेश्वर के दूत को अपने हाथ में तलवार दंचे हुये मार्ग में खडा देखा तय गदही मार्ग से अलग खेत में फिर गईउसे सार्ग में फिर ने के लिये बलआाम ने गदही को लाठी से मारा ॥ तब परमेश्वर ने गदही का मुंह खोला और उसने बल शाम से कहा कि मैंने तेरा क्या किया है कि तूने मुझे अब तीन बार माा है॥ तौ० गि० प० २२ । आ० २३ से २८ है॥ ) समीक्षक-प्रथम तो गदहे तक ईश्वर के दूतों को देखते थे और आजकल बिशप पादरी आदि श्रेष्ठ व अश्रेष्ठ मनुष्यों को भी खुदा वा उसके दूत नहीं दीखते हैं क्या आजकल परमेश्वर और उसके दूत हैं वा नहीं ? यदि हैं तो क्या बड़ी नींद में सोहे हैं ? व रोगी अथवा अन्य भूगोल में चले गये ? वा किसी अन्य धन्धे में लग गये वा अब ईसाइयों से रुष्ट होगा ? अथवा सरगये १ विदित नहीं होता कि क्या हुआ अनुमान तो ऐसा होता है कि जो अब नीं हैं, नहीं दीखते तो तब भी नहीं थे और न दीखते होंगे किन्तु ये केवल मनमाने रापोड़े उडाये हैं I ५४ ॥ समुएल की दूसरी पुस्तक । ५५-और उसी रात ऐसा हुआ कि परमेश्वर का बचन यह कह नाम को पहुंचा ॥ कि जा और मेरे सेवक दाऊद से कई i परमेश्वर यों कहता है मेरे निवास के लिये सू एक घर बनायेगा क्यों जब व इथरएस के सन्तान को मि से नि ाल लाया मैंने तो आ। ज के दिन घर में वाम न क्रिया परन्तु त में और डेरे में फिर किया ॥ तौ० समुएल की दूसरी पु० प० ७। आ० ४ : ५ । मैं । के . समीक्षक-अब कुछ सन्दे में रहा कि ३खाद्य का रिए मनुष यज्ञ देरी नहीं है। और उल हना देता है कि मैंने बहुत परिश्रम किया इधर उधर होटता रिश तो अब दाऊद प९ बनाद तो उनमें आराम का, दयाँ ईसाईों को ५ने ईध के औद