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पृष्ठ:सत्यार्थ प्रकाश.pdf/५७५

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चतुश : ने ५७३ और पवित्र किया अपर जरात को स्त्रियों के ॥ म ०१। चि० ३ । सू०३ ' आ० ३५ ॥ समीक-भला जब आजकल खुदा के फरिश्ते और खुदा के मी से बातें करने को नहीं आते तो प्रथम कैसे आये होंगे : जो कहो कि पदिल के मनुष्य पुण्यात्मा थे अब के नहीं तो यह बात मिथ्या है किन्तु जिस समय हूंसाई और मुसलमा का मत चला था उस समय उन देशो में जगली और विद्याहीन मनुष्य अधिक थे। इसलिये ऐसे विद्याविरुद्ध मत चल गये अब विद्वत्र अधिक हैं इसीलिये ईव चल सकता किन्तु जो २ ऐसे पोकल मजहब हैं वे भी अस्त होते जाते हैं वृद्धि की तो कथा ही क्या है : ४९ ॥ ५० - उसई कहता है कि टू ई बन ढांता दें । काफिरों ने घा कर दिया - | ईश्वर ने धोका दिया, ईश्वर बहुत सकर करनेवाला है । सं० १५ से २ ३ । सू० ३ । आ० ३६ } ४९ । समीक्षक-जब मुसलमान लोग खुदा के सिवाय दूसरी चीज नहीं मानते तो खुदा ने किस से कहा है और उसके कहने से कौन होगया १ इसका उत्तर मुसलमान सात जन्म में भी नही देख लेंगे क्योंकि बिना उपादुम कारण के कार्यो कभी नहीं हो कता बिना कारण के कार्य क ईसा जानो अपने समा बाप के बिना मेरा शरीर होगया ऐसी बात है । जो धोखा खाता अथॉ छल और दंभ करता है यह ईश्वर तो कभी नहीं हो सकता किन्तु उत्तम मनुष्य भी ऐसा काम नहीं करता ॥ ९ ॥ ५१-क्या तुक हूँ बहुत न t iके अलएँ तुमकों सtन हजार करती के साथ सहाय देने ' में ० १ । कि ० ४ । २० ३। आ० ११० ॥ समीक्षक-जो मुसलमानों को तीस हज़ार फरिश्तों के साथ समय देता था। तो अब मुसलमानों की बदृशही बहुत नष्ट होई और होती जाती है क्याँ सहाय नहीं देता १ इसलिये यइ बात केवल लोभ देके मूखर्यों को फंसाने के लिये महंा न्याय की बात है ॥ ५१ ॥ ५२ और काफिरों पर दमको सहाय ॥ अरIहूं तुम्हारी उत्तम सहायक और कारखा है जो तुम अल्लाह के सtरों में मारे जओ व मर जाओ अरजई की स्था बहुत अच्छी है सं० १। dि ४ सू० ३ । आ० १३० व १ ३३, १४० ॥ समीक्षकअब देखिये मुलमानों की भूल कि जो आपने संत से भिन्न हैं न। के मरने के लिये खुदा की प्रार्थना करते हैं क्य परमेश्वर भला है जो इनकी बात मान लेने यदि सूखल मानों का कारस। अल्लाह ही है तो फिर मुक्त भानों के कार्य . - ॥