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पृष्ठ:सम्पत्ति-शास्त्र.pdf/५८

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मानित।
श्रम-संयोग ।

श्रम विभाग मे श्रम की उम्पादक शक्ति जितनी पढ़ जाती है। उससे भी कहाँ अधियः श्रम संयोग से बढ़नी है। बहुन पादमियों के श्रम के मेल का नाम अमननयोग: । अथवा यो कहिए कि मिल कर अनेक प्रादमियों के फिरी र श्रमको श्रम संयोग कारन हैं। हम श्रम का एकीकरण भी फान मकन है। माग्न के बहुत बड़े रहें या बाहुन वजनी ल्यर के टुकड़े को एक समा ने दमरो जगा उठाये जाना पका पादमी का काम नहीं। पर यदि कई प्रादमी मिन्ट जायं ना उनके श्रम के प्रयोग मे या मामानी मे उठ माना है। श्रम संयोग में बड़े बड़े काम थाई घना में हो सका। एसोम इस नगद का श्रम, धर्मायभाग से भी अधिक उम्पादक. । जो धोती एम पहने हैं. वह अम-मयाग का का फल है । एक प्रादमी पं. श्रम मे या नहीं नयार हुई । पेन जॉननयाले, बीज बोनेवाले, मून फाननेवाले, कपडा बुनने. घाले किननेही पादमियों ने श्रम किया नया नयार हुई है। अर्थात घदम श्रम-मयोग की बदौलत मिली।

श्रम-मेशंग दो नगर का है । गया शुद्ध. दृग्नग मिश्र । एकाही समय में, एका जगा, पर, जब बहुत ग्रादमी मिल कर कोई काम करने नत्र इम शुभश्रम-पयोग काने । उदाहरण के लिए-किसी यड़नी लो. या लकड़ी की एक जगह में दुसगे जगह ले जाना, या गक भारी पत्थर को किसी मकान को छन पर पहुंचाना । जब जुदा जुदा जगह गौर जुदा जुदा समय मैं बाहुन मादमी एक दूसरे की मदद करके कोई काम करने में मब उस श्रम को गिननी मिश्र श्रम मंयोग में होनी है। इसका उदागा प्रोती है। EP नरह के कपड़े, अनाज, कागज. अंगरेजो कदम. पालपीन प्रादि इसी मिश्र धम-संयोग के उदार । मिश्र श्रमग्नयाग और श्रम विभाग को एकदा न समझना चाहिए । दोनाम भेद है । पाला एकही पेशं या व्यवसाय के जुदा जुदा श्रमों के अलग अलग विभाग करना । । दुसरा. जुदा जुदा शे या व्यवसाय के श्रम को एक करना है।

कलो से श्रम की उत्पादकता-वृद्धि ।

श्रम-विभाग और श्रम-संयोग से जसे श्रम की उत्पादकना बढ़ जाती बमेही कला र औजारों की मदद में भी बढ़ जाती है। यह एक ऐसी

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