पृष्ठ:सम्पत्ति-शास्त्र.pdf/९०

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सिक्का। ७१
रुपये में खुद ही नहीं आई। जिस चीज, जिस काम, जीस परिश्रम के बदले वह मिलता है उसी की वह शक्ति है। आपने महीने भर मेहनत करके यदि १०० रुपये कमाये और उन पर्यों को किताबें मोल ली तो मैं किताबें आप के रूपये के बदले में मिली हुई नहीं समझी जानी चाहिए : किन्तु अापको महीने भर की मेहनत के बदले में मिली समझनी चाहिए। रुपये ना सिर्फ इस बात की टिकिट, सर्टीफ्रिकट या सनद है कि अपने महीने सर मेहनत की है। जो लोग इस सूक्ष्म भेद को नहीं जानते थे रुपयें पैसे ही को सम्पत्ति समझते हैं। ऐसे ही लग रुपया देकर जब कोई चीज़ गरीदते हैं तव कहते हैं कि हमारी आज इतना धन खर्च हो गया। उनकी समझ में यह नहीं आता कि उलझा हम बाहर से पदार्थ रूपी धन घर ले आये। 

रुपये पसे से सोन काम होते हैं। एक तो, घह दो चीज़ के विनिमय साधन में मध्यस्य का काम करता है। दुसरे, चिन्मिय-साक्ष्य दो चीज़ो की क़ीमत की वह तादाद बतलाता है। तीसरे, भविष्य में जो चीज़ देनी होती है उसकी क़ीमत वह पहले ही से बता देता है ।इस तीसरी बात को ज़रा स्पष्ट करके बतलाने की ज़रूरत है। कल्पना कीञ्जिए कि देबदच ने यज्ञदत्त से रुपये की ३०० मन लकड़ी ली और धादा किया कि ३ वर्ष बाद में आपके ये रुपये लौटादूगा। अब यदि ३ घर वाद लकड़ी की कीमत भूनी हो जांय, अर्थात् ३०० मन लकड़ी चूः पये की मिलने लगे, ने भी देवदत्त के सिर्फ सही रुपये यादत्त को, देनगे। यदि रुपये के द्वारा लकड़ी की क़ीमत पहले ही से न निश्चित होती ही देवदत्त को लकड़ी के तान मुल के हिसाव से दूना धन/ यशदत्त को देना पड़ता। रूपये * पसे के रल से समाज को बहुत लाभ होता है।

यई नियम हहीं है कि सिक्षा सेने, चांदीचे ही का हो। अनेक नव का सकता हैं। राजा से सब लोगों को उसे कुम्ल.. भर कर कैना- चालवा, लकड़ी, कौड़ी, सोप, घोंघे, बादाम, अंॐ, ४५:२३ आदि चीजन्सिॐ क.काम दे चुकी हैं फौड़ियाँ-तौ इंसुदन अब भी) चलती हैं। यद्यपि यत-सी चीज का निकाहो सकताहै हथप सिक्का छौने की योग्यता आने के लिए मुग्न्यीन मुर्गी का है। जरूरी है। यो (१) जिस चीजे सक्को जारी करना-हैं- इसकी कीमत में बहुत फेर फार न होना चाहिए।'हमै स्थिर रहनी -- :)