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श्री हाजी हबीबके प्रस्ताव करने और श्री इमाम साहबके समर्थन करनेपर मौलवी साहब अध्यक्ष बनाये गये। मौलवी साहबने कहा कि श्री कैलेनबैकने जो काम किया है उसके लिए उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करनेके उद्देश्यसे यह सभा की गई है। वे हम सबकी कृतज्ञताके पात्र हैं। श्री पोलक और श्री कैलेनबैंक हमारे देशभाई नहीं हैं, फिर भी उन्होंने हमारे लिए बहुत बड़ा काम किया है।
श्री इब्राहीम कुवाड़ियाने प्रस्ताव रखा कि यह सभा श्री कैलेनबैकके प्रति उनकी उदारता और सहानुभूतिके लिए कृतज्ञता प्रकट करती है।
इमाम साहबने प्रस्तावका समर्थन और श्री हाजी हबीबने अनुमोदन किया । इसके बाद श्री काछलिया और श्री रायप्पन बोले और प्रस्ताव सर्वसम्मति से स्वीकृत किया गया ।
श्री कैलेनबैकने धन्यवाद देते हुए कहा कि मैं लड़ाईमें सहानुभूति प्रकट करके स्वयं लाभान्वित हुआ हूँ; और इसी प्रकार अन्य गोरे भी । यह लड़ाई ऐसी अच्छी है कि जो भारतीय इसमें सम्मिलित हैं उन्हें सबसे अधिक लाभ हो रहा है।
जोज़ेफ़ रायप्पन
श्री जोज़ेफ़ रायप्पन शुक्रवारको रिहा किये गये । रिहाईके बाद ही उन्हें निर्वा- सित किया जाना था। इसलिए उनको तीन बजे उपस्थित होनेका आदेश देकर जोहा- निसबर्ग जेलसे छोड़ दिया गया। तीन बजे थानेमें पहुँचते ही उनको आज्ञा दी गई कि वे १४ तारीखको निर्वासित किये जानेके लिए उपस्थित हों। इसलिए वे तुरन्त ही फार्ममें रहनेके लिए आ गये और पहले ही दिनसे काम करने लगे। उनके साथ श्री सॉलोमन अर्नेस्ट भी आ गये। इस तरह फार्ममें बहुत लोग भर्ती हो गये हैं और जितने लोग आते हैं वे सब काममें लग जाते हैं। श्री रायप्पनने लकड़ी काटने और ढोने, स्टेशनके गोदामसे माल निकालने और गाड़ीमें लादने, पानी भरने और कपड़े धोनेका काम रविवार तक किया है । वे स्वयं प्रसन्न रहकर दूसरोंको प्रसन्न रखते हैं।
कैदियोंका भोजन
कैदियोंके खानेमें बड़ा परिवर्तन हो गया है। चावल दो औंस बढ़ा दिया गया है। शामको रोटी, पुपु और एक औंस घी दिया जाता है। इसलिए अब खानेके बारेमें शिकायतके लायक कोई बात नहीं रह जाती ।
जंजीबारमें नहीं उतारे गये
श्री कावसजी दिनशाने तार दिया है कि श्री पी० के० नायडू और उनके साथियों- को, जो जंजीबारमें उतरनेवाले थे, वहाँ नहीं उतारा गया है। जान पड़ता है कि अधिकारियोंने जंजीबारके किसी कानूनके द्वारा रोक लगा दी है। इसलिए वे सभी सत्याग्रही भारत चले गये हैं। जंजीबारमें भारतीय नहीं उतर सकते, यह नियम नया है । यह कैसे बना सो ठीक मालूम नहीं हुआ है, परन्तु यह नियम सब भारतीयोंको चौंका देनेवाला है। अंग्रेजी स्वतन्त्रता क्या है, यह अब जाहिर हो रहा है।