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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 11.pdf/१६

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दस परिवेश" का सूचक है। इस हिसाब में रोज-रोज जिन वस्तुओं का उल्लेख होता है, उन्हें देखिए: चमड़ा - यह कैलेनबैकके लिए खरीदा जाता था, कैलेनबैंक अपने वर्ग में विद्यार्थियों को चप्पलें बनाना सिखाते थे जिसे उन्होंने ट्रेपिस्ट साधुओंके मठमें सीखा था; शक्कर -- यह नमककी जगह काम में आती थी; व्यक्तिगत चिट्ठियोंके लिए स्टॅम्प - लेकिन ये चिट्ठियाँ प्राप्त नहीं हैं; लॉली स्टेशनसे प्रतिदिन आनेवाले दूधकी कीमत; उन यात्रियोंका रेलभाड़ा जो अपनी समस्याऐं सुलझानेके लिए टॉल्स्टॉय फार्म आते रहते थे । दिसम्बरकी डायरी में एक तारीखमें यह टीप मिलती है कि अगले साल 'इंडियन ओपिनियन' में और ज्यादा घाटा होगा। पैसेकी समस्या कठिन हो गई थी -- टॉल्स्टॉय फार्म, फीनिक्स, शिक्षाके प्रयोग आदिके लिए पैसेकी जरूरत थी और टाटा के दानसे अथवा डॉ० मेहताको अक्षय उदारता से उसकी केवल आंशिक पूर्ति ही हो सकती थी। अपनी सत्योपासना के प्रसंग में अब गांधीजीने जीविकाके लिए वकालतका त्याग कर दिया था और कठिनाईका मुख्य कारण यही था। डॉ० प्राणजीवन मेहताके नाम अपनी सन् १९११की चिट्ठियों में गांधीजी एकाधिक बार अपनी भारत लौट आनेकी इच्छाका उल्लेख करते हैं। गोखलेकी दक्षिण आफ्रिकाकी यात्राके बाद उनकी यह इच्छा और तीव्र हो गई दिखती है। २६ नवम्बर १९१८ के पत्रमें वे कहते हैं कि उन्होंने गोखलेको आश्वासन दिया है कि वे भारत तबतक नहीं लौटेंगे, जबतक उन्हें वहाँ उनकी जगह लेनवाला कोई व्यक्ति नहीं मिल जाता और यह व्यक्ति सम्भवतः पोलक होंगे । १ दिसम्बरको अपनी डायरी में वे कहते हैं कि मैंने भारतीय पोशाक पहनना शुरू कर दिया है। मातृभूमिको पुकारको अब वे और नहीं टाल सकते; दक्षिण आफ्रिकासे विदाकी घड़ी निकट आ गई है और वे प्रस्थानकी तैयारी कर रहे हैं । Gandhi Heritage Portal