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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 11.pdf/१६३

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पत्र: छगनलाल गांधीको १२७ प्रवासी और पंजीयन कानूनोंके कारण हमपर थोपे गये दीर्घकालीन संघर्षके दौरान आपने हमारी जो सहायता की, वह स्वयंस्फूर्त थी, इसलिए उसका मूल्य और बढ़ गया है। आपने ऐन मौकेपर सत्याग्रहियोंको इस्तेमाल के लिए टॉल्स्टॉय फार्म देनेकी जो उदारता दिखाई थी, वह हमारे लिए अनमोल सहायता सिद्ध हुई । और हमारे गाढ़े समय में आपने व्यक्तिगत रूपसे हमारी जो मदद की है, उसका मूल्य तो चुकाया ही नहीं जा सकता । आपने ट्रान्सवाल यूरोपीय समिति के अवैतनिक मन्त्रीकी हैसियतसे जो कार्य किया है, उसके लिए भी हम आपके आभारी हैं। आपने इन और ऐसी ही अन्य कई कृपाओंसे भारतीय समाजको सदाके लिए अपना ऋणी बना लिया है । हम दुआ करते हैं कि इस सबके लिए भगवान् आपपर अनुकम्पा करें । अ० मु० काछलिया, अध्यक्ष मो० क० गांधी अवैतनिक मन्त्री ब्रिटिश भारतीय संघ [ अंग्रेजी से ] इंडियन ओपिनियन, ५-८-१९११ १०९. पत्र : छगनलाल गांधीको जोहानिसबर्ग श्रावण सुदी ७ [ अगस्त १, १९११ ] चि० छगनलाल, तुम्हारे पत्रसे लगता है कि तुम फिर घबड़ाये हुए हो। इसका कोई कारण मैं नहीं देखता । चि० जमनादासको केप अथवा लन्दनकी मैट्रिककी परीक्षा देनी हो, तो दे सकता है। लेकिन परीक्षा देकर क्या करेगा, यह मेरी समझ में नहीं आता । परीक्षाकी तैयारी करते हुए उसके लिए जो कुछ पढ़ना पड़ेगा, उसमें समय लगाना व्यर्थं होगा; क्योंकि उसे तो बादमें भूलना ही है। इस बातका विचार करना चाहिए कि जमनादासको १. छगनलाल गांधी जुलाई महीने में अपने साथ जमनादासको दक्षिण आफ्रिका लाये थे; देखिए “पत्र : मगनलाल गांधीको", पृष्ठ १२३ । इससे प्रकट होता है कि यह पत्र सन् १९११ में लिखा गया। उस वर्षे श्रावण सुदी ७ को अगस्तकी पहली तारीख पड़ती थी। श्री छगनलाल गांधी भी - जिनके सौजन्यसे यह पत्र प्राप्त हुआ है - इस तारीखकी पुष्टि करते हैं । Gandhi Heritage Portall