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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 11.pdf/१७४

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१३८ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय किये हैं उनके सम्बन्धमें तथा जो जायदादें सरकारी कागजोंमें उनके नामपर दर्ज हैं, परन्तु वास्तवमें जिन्हें वे इस समाजके सदस्योंके लिए धरोहरके रूपमें रखे हुए हैं, उनके सम्बन्धमें अगर जरूरत हुई तो कारावास भोगनेपर भी समाजकी सहायता करनेका जो उदारतापूर्ण वचन दिया है उसके लिए आभार प्रकट करती है । प्रस्तावक - श्री दादू (क्रूगर्सडॉर्प) ; समर्थक - • अहमद खाँ (रूडीपूर्ट) । 46 - 'स्वर्ण-कानून और सन् १९०८ कस्बा - कानून संशोधन अधिनियम ( टाउनशिप्स अमेंडमेंट ऐक्ट) को लेकर भारतीय व्यापारियोंको उनकी जायदादों और कारोबारसे वंचित करनेका जो यत्न किया जा रहा है यह सभा अपनी पूरी शक्तिके साथ उसका प्रतिकार करने और आनेवाली मुहिममें कारावास तथा अन्य संकटोंको झेलने और उन्हें सहनेका निश्चय करती है । " - प्रस्तावक - श्री इस्माइल आमद मुल्ला; समर्थक - - श्री आमद मूसाजी; और अनुमोदक- - श्री इ० एस० कुवाडिया । " - यह सभा अध्यक्षको अधिकार देती है कि वे इन प्रस्तावोंकी नकलें भेजते हुए एक विनम्र आवेदनपत्र द्वारा सरकारसे अनुरोध करें कि वह इन उपर्युक्त कानूनोंमें इस तरह के परिवर्तन कर दे, जिससे भारतीय समाज अपने आपको आश्वस्त अनुभव कर सके और यह कि वह उनके वैध व्यवसायोंकी रक्षा करे । - श्री ए० एम० वाजा; समर्थक - श्री ए० ए० करोडिया; और अनुमोदक -- श्री एच० माल तथा श्री एम० एस० नाना । गया । प्रस्तावक -- इस लड़ाईके लिए चन्दा एकत्र करनेका काम शुरू करनेका भी निश्चय किया [ अंग्रेजीसे ] इंडियन ओपिनियन, १९-८-१९११ १. इब्राहीम सालेजी कुवाडिया; जोहानिसबर्गके प्रसिद्ध व्यापारी और किसी समय हमीदिया इस्लामिया अंजुमनके कोषाध्यक्ष; सन् १९०९ और १९१० में ब्रिटिश भारतीय संघके कार्यवाहक अध्यक्ष ( खण्ड ९, पृष्ठ २५२ पा० टि० १; खण्ड १०, पृष्ठ २८६ पा० टि० २ ); सन् १९०८ और १९०९ में सत्याग्रहीके रूपमें कई बार जेल गये; जून १९०९ में भारतको जानेवाले प्रस्तावित भारतीय शिष्टमण्डलके सदस्य चुने गये; लेकिन बादमें शीघ्र ही गिरफ्तार कर लिये गये; देखिए खण्ड ९, पृष्ठ २५३ और २८८ तथा खण्ड ६ और ८ भी । Gandhi Heritage Porta