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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 11.pdf/२८५

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सार्वजनिक पत्र : रतन जे॰ टाटाको

विशुद्ध राजनीतिक कह सकते हैं उसमें मैं फिर भी भाग लेता ही रहूंगा और यहां राजनीतिक कामका अर्थ है सम्मान और प्रतिष्ठापूर्वक अपनी जीविका चलानेका यथाशक्ति प्रयत्न करते रहना।

मो॰ क॰ गांधी

[ सहपत्र]

 

हिसाब

आय पौं॰ शि॰ पें॰ व्यय पौं॰ शि॰ पें॰
भारतसे चन्दा मिला       सत्याग्रहियों और उनके      
(इसमें श्री रतन टाटा       परिवारोंको सहायता दी      
से प्राप्त ५०,००० ०       गई २,३३५
भी शामिल है ६,७२३ लन्दनकी समितिको भेजा १,४९०
रंगूनसे प्राप्त ९७२ 'इंडियन ओपिनियन' १,२००
        वेतन ५३०
जंजीबारसे ५९ मार्ग-व्यय और माल-भाड़ा ४८२ ११
मोजाम्बिकसे ५० किराया आदि ३५३ १९
मुम्बासासे १८ १२ १० केप टाउन, नेटाल और      
डेलागोबा-बेसे ११ १२ ट्रान्सवालमें कानूनी कार्र-      
        वाईपर व्यय ३७१
तमाकानसे १७ तार-व्यय १२१ १८
नबिशासे समुद्री तार १९१
चिन्देसे १५ समाचारपत्र १५४ १२ १०
चाइचाईसे डाक टिकट ६५ १२
ब्लैटायरसे स्टेशनरी ३९ १३ ११
लन्दनसे १५९ १९ ड्राफ्टों और चेकोंपर बैंकका      
स्थानिक (इसमें सारे       कमीशन ३१ १०
द॰ आफिकामें विभिन्न       फार्मकी पूंजी मकान बनाने      
स्थानोंसे मिला चन्दा,       और सामानका व्यय ४९२ ११ ११
विद्यार्थियोंके भोजन       'फार्म' को ठीक रखनेका      
व्ययके लिए प्राप्त रकम       व्यय      
राशियां भी शामिल हैं) ४५९ १०        
देना शेष ४३        
  —— ——   —— ——
  ८,५०९ १३   ८,५१९ १३ []
  —— ——   —— ——
[अंग्रजीसे]
इंडियन ओपिनियन, ६-४-१९१२
  1. कुल रकमोंके सही योगकी दृष्टिले यही संख्या होनी चाहिए, किन्तु मूलमें ८५०९ है, जो कदाचित् छपाईकी भूल है। यह बात पत्रमें आये गांधीजीके इस वाक्यसे भी सिद्ध होती है कि "आप देखेंगे, नमाके मुकाबले खर्च अधिक हो गया है।" देखिए पृष्ठ २४६।