स्कूल हमारी आवश्यकताओंकी पूर्ति अधिक अच्छी तरह कर सकेगा, क्योंकि तब यह सरकारी हस्तक्षेप से बरी रहेगा ।
(यह लेख छपते-छपते हमें जोहानिसबर्ग से और भी पत्र मिले हैं, जिससे स्थिति में कुछ परिवर्तन हो जाता है । परन्तु हमारा खयाल है कि हमारा मुख्य तर्क अब भी जहाँका - तहाँ है ।)
- [ अंग्रजीसे ]
- इंडियन ओपिनियन, १८-५-१९१२
२२०. पत्र : ई० एफ० सी० लेनको
लॉली
मई २१, १९१२
आपका इसी माहकी १४ तारीखका पत्र[१] मिला। उसके लिए धन्यवाद !
यदि वैकल्पिक धाराका अर्थ यह हो कि शिक्षित एशियाइयोंकी दृष्टिसे हमारे पत्र-व्यवहारमें उल्लिखित हलफनामेकी[२] जरूरत नहीं रह जाती तो मेरे विचारसे यह धारा सन्तोषजनक है । निवेदन है कि उक्त धारामें निश्चित रूपसे यह व्यवस्था की गई है कि अनुसूची २ में उल्लिखित हलफनामेकी कोई जरूरत नहीं होगी ।
अधिवास सम्बन्धी कठिनाईको हल करनके लिए मैं जनरल स्मट्सको धन्यवाद देता हूँ ।
मैं यह भी आशा करता हूँ कि जब विधेयक समितिके सामने पेश होगा तब मैंने अपने पत्रोंमें[३] जिन दूसरी कठिनाइयोंका उल्लेख किया है, उनका भी समाधान हो जायेगा । जहाँतक मैं समझा हूँ, ये कठिनाइयाँ अस्थायी समझौतेके परिणामस्वरूप उत्पन्न हुई हैं ।
हृदयसे आपका,
- गांधीजीके स्वाक्षरोंमें अंग्रेजी मसविदे (एस० एन० ५६५३) की फोटो-नकलसे ।
- ↑ १. देखिए परिशिष्ट १६ ( गांधीजीके नाम लेनका पत्र ) ।
- ↑ २. इस हलफनामे में ऑरेंज फ्री स्टेटमें प्रवेश करनेवाले एशियाश्योंको यह घोषणा करनी पड़ती थी कि उनका उस प्रान्तमें व्यापार अथवा खेती-बाड़ी करनेके लिए बसनेका कोई इरादा नहीं है; देखिए परिशिष्ट १३ ।
- ↑ ३. देखिए ई० एफ० सी० लेनको लिखे पत्र (पृष्ठ २१०-१२, २२७-२८, २३७, २५० और २५३-५४) ।