- वह संरक्षकसे शिकायत करने डर्बन आई, और तभी से गिरमिटके अनुसार [ उक्त मालिकका ] काम करनेसे बराबर इनकार करती रही है। मुकदमेके दौरान एक मुद्दा यह उठाया गया था कि क्या एक ही अपराधके लिए बार-बार और लगातार सजाएँ दी जा सकती हैं। श्री गिब्सनने बताया कि ऐसे मामलोंसे सम्बन्धित एक खण्डमें यह व्यवस्था है कि न्यायालयके किसी आदेशका पालन करनेसे जितनी बार इनकार किया जायेगा, उसके लिए अलग-अलग उतनी ही बार सजा दी जा सकेगी। गिब्सन महोदयने आगे कहा कि यह बात बड़ी दुर्भाग्य- पूर्ण जान पड़ती है कि इस प्रकार किसी महिलाको केवल इसलिए बार-बार सजा दी जाये कि उसने किसी खास जगहपर काम करनेसे विशेष अरुचि दिखाई है । यह भी बताया गया कि यदि इस औरतका किसी और जगहपर तबादला हो जाये तो यह वहाँ काम करने को तैयार है। श्री गिब्सनने मामला एक हफ्तेके लिए मुल्तवी कर दिया और इस बीच जडुबंसीको संरक्षकके पास भेज दिया गया ताकि वह इस बातपर गौर करें कि उसके सम्बन्ध में क्या-कुछ किया जा सकता है ।
हमें इस रिपोर्टमें कुछ और भी जोड़ना है, क्योंकि हमें उस महिलाके निकट-सम्पर्क में आनेका मौका मिला है। अप्रैल माह के प्रारम्भमें वह फीनिक्स आई थी और उसने अपना पूरा किस्सा हमें विस्तारसे बताया था । अव्वल तो उक्त महिला स्टैंगरके किसी संस्थानमें काम नहीं करती थी, बल्कि वह साउथ कोस्टके एक भूमि-धरके यहाँ -- जिसका नाम बताना अभी जरूरी नहीं -- गिरमिटिया मजदूरिन थी । विव-रणसे हमें ज्ञात होता है कि जदुबंसीका बच्चा जल गया था। वह जला ही नहीं था, बल्कि इतनी बुरी तरह जल गया था कि उसीसे उसकी मृत्यु हो गई । जदुबंसी अपने मालिकपर यह आरोप लगाती है कि एक बार घावोंपर पट्टी बँधवा देनेके बाद उसने फिर कहे जानेपर भी जानबूझकर उनकी ओर कोई ध्यान नहीं दिया, नतीजा यह हुआ कि उनसे बदबू आने लगी। अपने मालिकके घरके कामसे उसे सुबहके ५ बजेसे लेकर शामके ७ बजे तक बच्चेसे अलग रहना पड़ता था। इस बीच उसे सिर्फ दो बार नाश्ते और भोजनके लिए थोड़ी-थोड़ी देरकी फुर्सत मिलती थी । फलस्वरूप बच्चेको अकेला छोड़ना पड़ता था । पन्द्रह दिनके भयंकर कष्टके बाद बच्चेको अस्पताल भेज दिया गया, जहाँ थोड़े ही दिनोंमें उसकी मृत्यु हो गई । बच्चेकी मृत्युके बाद जदुबंसीको जिन कठिन मुसीबतोंसे गुजरना पड़ा, उनके सम्बन्ध में बताते हुए उसने कहा कि उसके मालिकने तीन दिनों तक उसे भोजन नहीं दिया, हाथचक्कीपर मक्की पीसनेको मजबूर किया, ठोकरें मारकर उसके साथ दुर्व्यवहार किया और उसका वेतन रोक रखा। वह बताती है कि पूरे सालकी मजदूरीमें उसे कुल ६ शिलिंग मिले ।
हम जदुबंसीको लेकर भारतीय प्रवासियोंके संरक्षकके पास गये । हमने संरक्षकको सारा हाल बताया और फिर उसकी शिकायतोंकी जाँच होने तक के लिए उसे उक्त