है। इसके अतिरिक्त, यदि हम इस पत्रके द्वारा अपना पूरा निर्वाह करना ठीक नहीं मानते तो हमें यह अधिकार नहीं है कि हम अपने स्थानका उपयोग विज्ञापनोंके लिए करें और अपना समय उन्हें तैयार करने में लगायें। अबतक भी हम जो विज्ञापन लेते थे उनके चुनावमें विवेकका उपयोग करते थे और ऐसे अनेक विज्ञापन अस्वीकृत करते रहे हैं जो हमारे मन्तव्योंसे संगत नहीं होते थे। आशा है कि हमारे जो मित्र और हितचिन्तक आजतक हमारी सहायता करते रहे हैं वे हमारे विज्ञापन छापना बन्द कर देनेका कुछ और अर्थ नहीं समझेंगे। इस समाचारपत्रको प्रकाशित करनेके दो उद्देश्य[१] हैं : दक्षिण आफ्रिकाके ब्रिटिश भारतीयोंकी शिकायतोंको लोगोंके सामने लाना और उन्हें दूर करनेके उपाय करना तथा साथ ही जीवनको ऊँचा उठानेवाली पाठ्य सामग्री प्रकाशित करके जन-शिक्षणका कार्य करना। आशा है, हमारे पाठक हमारी स्थिति को समझेंगे और पत्रके ग्राहक बनकर इसकी यथापूर्व सहायता करते रहेंगे।
- [अंग्रेजीसे]
- इंडियन ओपिनियन, १४-९-१९१२
२७६. जोहानिसबर्गका प्रस्तावित स्कूल
श्री हबीब मोटनको प्रस्तावित भारतीय स्कूलके सम्बन्धमें जो सबसे ताजा उत्तर मिला है, वह पहले उत्तरसे[२] तो अच्छा है; फिर भी हमारे विचारसे वह सर्वथा अस्वीकार्य है। उसमें असमानताकी प्रणाली अब भी बरकरार है, जो बहुत आपत्तिजनक है। उसमें वेतन योग्यताके अनुसार नहीं, चमड़ीके रंगके आधारपर दिये जानेकी बात है।[३] हमारी समझमें अधीक्षककी कोई आवश्यकता नहीं है; किन्तु यदि हो भी तो हम आशा करते हैं कि अधीक्षककी नियुक्ति गोरे लोगों में से ही किये जानेकी व्यवस्थापर सम्बन्धित व्यक्ति तीव्र आपत्ति करेंगे।
हमारी इन महत्वपूर्ण आपत्तियोंके अतिरिक्त यह आशंका भी है कि सरकारका प्रस्ताव अभियोजकोंके उद्देश्यको ही विफल कर देगा। वे भारतीय बच्चोंको उनकी अपनी मातृभाषामें शिक्षा नहीं दे पायेंगे। कारण, सरकार [भारतीय शिक्षकोंको]
- ↑ इंडियन ओपिनियनके उद्देश्योंके विषय में गांधीजीकी पिछले उल्लेखोंके लिए देखिए खण्ड ४, पृष्ठ १०६, ३४५-४६, ३५८-५९ और ३६७-६८ खण्ड ७, पृ४ १९०; दक्षिण आफ्रिकाके सत्याग्रहका इतिहास, अध्याय १९ और २० तथा आत्मकथा, भाग ४, अध्याय १३, १९, २० और २१।
- ↑ देखिए "जोहानिसबर्गका स्कूल", पृष्ठ २५९-६०।
- ↑ विश्वाटर्सरेड केन्द्रीय स्कूल निकाय (सेंट्रल स्कूल बोर्ड) ने यूरोपीय प्रिंसिपलके लिए सालाना २०० पौंड, यूरोपीय पुरुष शिक्षकोंके लिए सालाना १५० पौंड, यूरोपीय महिला शिक्षकोंके लिए प्रति वर्ष १२० पौंड और भारतीय शिक्षकोंके लिए, उनकी योग्यताके अनुसार, सालाना ४० से ६० पौंड तक देना मंजूर किया था। निकायके मन्त्रीने अपने ४ सितम्बरके पत्र में प्रस्तावित स्कूलके प्रिंसिपल तथा शिक्षकोकी योग्यता भी निर्धारित कर दी थी। इसके अतिरिक्त उसने अधीक्षक पदपर किसी यूरोपीयकी नियुक्तिकी ही सिफारिश की थी। इंडियन ओपिनियन, १४-९-१९१२।