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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 11.pdf/३६९

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भाषण : केप टाउनमें गो॰ कृ॰ गोखलेकी स्वागत-सभामें

भारतके वाइसरॉयकी कौंसिल के सदस्य हैं, और मेरा विश्वास है कि आप निजी तौरपर दक्षिण आफ्रिकी संघ में संघ-सरकारकी पूर्ण सहमतिसे एक ऐसे आर्थिक मसलेकी जाँच करने आये हैं जो हमारे मध्य उत्पन्न हो गई है और जिसे लेकर हमारे साथी भारतीय प्रजाजन कुछ समय से परेशानीका अनुभव कर रहे हैं। मुझे दक्षिण आफ्रिका के इस प्रथम नगर में आपका स्वागत करते हुए प्रसन्नता हो रही है और में यह आशा प्रकट करता हूँ कि आपके कार्यके परिणामस्वरूप यह कठिनाई ऐसे ढंगसे हल हो जायेगी, जो सभी सम्बन्धित जनोंके लिए सन्तोषजनक होगा (तालियाँ)...

श्री मो॰ क॰ गांधीने कहा, श्री गोखलेका नाम मेरे लिए एक पवित्र नाम है। वे मेरे राजनीतिक गुरु हैं। और दक्षिण आफ्रिका में, जिसका मैं नागरिक होने का दावा करता हूँ, अपने देशभाइयोंकी यत्किचित् सेवा श्री गोखलेके कारण ही कर सका हूँ। (हर्षध्वनि)। दक्षिण अफ्रिकाका यह प्रश्न उनके लिए नया प्रश्न नहीं है। किन्तु हमारे प्रेमका कारण उस प्रश्नमें उनकी रुचि ही नहीं है, बल्कि उसका कारण वे काम हैं जिन्हें वे जीवन-भर करते रहे हैं। यद्यपि वे भारत सरकारकी स्पष्ट आलोचना करते हैं, किन्तु वे उसके मित्र भी हैं। (तालियाँ)। मेरे खयालसे यह एक आशाप्रद लक्षण है कि यहाँ इस सभामें, जिसकी अध्यक्षता मेयर कर रहे हैं, सभी जातियोंके प्रतिनिधि आये हैं। श्री गोखलेका जो सत्कार किया गया है, उससे प्रकट होता है कि यूरोपीय और भारतीय समाजों में करारी टक्करोंके बावजूद कटुता उत्पन्न नहीं हुई है। जहाँ-जहाँ ये सभाएँ की जानेवाली हैं, उन सभी शहरोंके मेयरोंने अध्यक्षता करनेका अपना इरादा व्यक्त किया है। श्री गोखले दोनों समाजोंको निकटतर लाने में हमारी सहायता करने आये हैं और आप उनके कार्यसे जान जायेंगे कि इस देश के पीछे दूसरा एक ऐसा देश भी है जिसके लोग यहाँ स्थित अपने प्रतिनिधियोंपर ध्यान लगाये हुए हैं। हम जानते हैं कि इसी प्रश्नके सम्बन्ध में अगले वर्ष किसी समय महाविभव आगा खाँके आनेकी आशा की जाती है।[] ब्रिटिश भारतीय संघको उनका एक पत्र अभी मिला है, जिसमें उन्होंने अपना यह विचार प्रकट किया है कि वे उस प्रश्नका, जहाँतक वह उनके यहाँ बसे हुए देशवासियोंको प्रभावित करता है, अध्ययन स्वयं करनेके लिए दक्षिण आफ्रिका आ रहे हैं। किन्तु मैं कुछ शब्द चेतावनी के रूपमें कहना चाहता हूँ और वे ये हैं कि हममें से कितने ही लोग अज्ञानवश यह झूठी आशा बाँधे हुए हैं कि श्री गोखलेकी यात्रा कोई जादू कर देगी और उससे उनकी सब निर्योग्यताएँ लुप्त हो जायेंगी। मैं आशा करता हूँ कि मेरे देशवासी ऐसी अपेक्षाएँ नहीं करेंगे या यदि उनकी ऐसी अपेक्षाएँ हैं तो उन्हें त्याग देंगे। श्री गोखले अवश्य हमारी सहायता करेंगे, किन्तु हमें यह स्मरण रखना है कि अपने पैरोंपर खड़े होनेसे अधिक मूल्यवान कोई वस्तु नहीं है। (तालियाँ)। हमें

 
  1. देखिए "भाषण : ब्रिटिश भारतीय संघकी सभामें", पृष्ठ ३०९।