रवाना होनेसे पहले औरोंके सिवा माक्विस क्रू (भारत-मन्त्री) श्री हरकोर्ट (उपनिवेश-मन्त्री), लॉर्ड ग्लैडस्टन, सर रिचर्ड सॉलोमन और सर स्टार जेमसनसे भी भेंट ली थीं।
वे दक्षिण आफ्रिकामें कबतक हैं?
श्री गोखले नवम्बर ६ को नेटालके लिए रवाना होंगे। डर्बनमें उनके स्वागतकी जोर-शोर से तैयारियाँ की जा रही हैं। १४ तारीखको वे प्रिटोरियाके मन्त्रियोंसे भेंट करेंगे और उसके बाद तुरन्त ही डेलागोआ बेसे होते हुए भारत लौट जायेंगे।
लेकिन इतने महत्वपूर्ण कार्य के सम्पादनके लिए तो यह समय निश्चय ही बहुत थोड़ा है?
हाँ, बहुत ही थोड़ा है; लेकिन श्री गोखलेको विधान परिषदके अपने कामके सिलसिले में दिसम्बर के शुरूमें भारत पहुँच जाना है।
लेकिन क्या संघीय मन्त्रियोंसे भेंट करने के समय तक श्री गोखले विभिन्न प्रश्नोंपर अपने सभी मन्तव्य निश्चित कर चुकेंगे?
एक भी अधिकार छोड़ा नहीं जायेगा
हाँ, कर चुकेंगे। भारतीयोंके अधिकारोंके बारेमें तो उनको अपनी कोई राय बनानी ही नहीं है। वे तो खुला मन रखकर यहाँ यही सुनने-समझने आये हैं कि भारतीयों और यूरोपीयोंके इस झगड़े में यूरोपीयोंका क्या कहना है। सिद्धान्तकी हद तक वे एक प्रतिष्ठित देशभक्तके नाते अपने देशवासियोंका कोई भी अधिकार छोड़ देनेकी बात तो कभी सोच नहीं सकते। परन्तु, सिद्धान्तको व्यवहारका रूप कैसे दिया जाये, इस सम्बन्धमें ब्रिटिश भारतीयोंके विरुद्ध इस देशमें निरन्तर प्रचार करनेवालोंके सम्पर्क में आने और उनसे स्थानीय परिस्थितिकी जानकारी हासिल करनेपर उनके निष्कर्षो में कुछ फेरफार हो सकता है।
बातचीत के दौरान श्री गांधीने आगे चलकर अपना यह विश्वास व्यक्त किया कि समस्या तो अब एक तरहसे संघको अधिवासी भारतीय जनताके साथ होनेवाले व्यवहार तक ही सीमित रह गई है, और कहा कि श्री गोखलेका भी यही खयाल है।
मैं समझता हूँ कि इस सम्बन्धमें श्री गोखले मोटे तौरपर इस निष्कर्षपर पहुँच चुके हैं कि यहाँके भारतीय अधिवासियोंको नागरिक समानता मिलनी चाहिए। अर्थात्, संघके भीतर उनके आवागमनपर बन्दिशें नहीं लगाई जानी चाहिए और समाजपर लगाये जानेवाले आम किस्मके प्रतिबन्धोंके अधीन रहते हुए उनको व्यापारकी स्वतन्त्रता प्राप्त होनी चाहिए।
और फ्री स्टेटके बारेमें?
जहाँतक फ्री स्टेटकी बात है, श्री गोखले अभी वहाँके कानूनका अध्ययन कर रहे हैं, इसलिए यह बतलाना कठिन है कि उसके सम्बन्धमें उनके निष्कर्ष क्या होंगे। व्यक्तिगत रूपसे मेरा खयाल है कि फ्री स्टेट अभी कुछ वर्षोंतक भूमिकी मालिकी और व्यापार करने के बारेमें अपनी मौजूदा नीतिपर ही चलेगा। प्रवास सम्बन्धी