प्रतिबन्धके बारेमें स्थिति यह है कि समझौतेके अनुसार नये अधिनियमके अन्तर्गत जिन थोड़े-से नये प्रवासियोंको प्रवेश दिया जायेगा उन्हें संघके सभी भागोंमें जाने-आनेकी स्वतन्त्रता रहेगी। इसलिए प्रवासके सम्बन्धमें उनपर फ्री स्टेट द्वारा लगाये गये प्रतिबन्ध लागू नहीं होंगे, परन्तु वे उस प्रान्तमें व्यापार नहीं कर सकेंगे और न खेती ही कर सकेंगे। परन्तु फ्री स्टेट द्वारा लगाये गये सभी प्रतिबन्ध किसी-न-किसी दिन तो पूर्णतः हटने ही चाहिए, नहीं तो संघ एक तमाशा बन जायेगा।
इंडियन ओपिनियन, २३-११-१९१२
२९१. भाषण : गोखलेके सम्मानार्थ जोहानिसबर्ग में आयोजित भोजके अवसरपर[१]
अक्तूबर ३१, १९१२
श्री गांधीने भोजके अवसरपर अध्यक्ष और यूरोपीय अतिथियोंके लिए मंगलकामनाका प्रस्ताव रखते हुए कहा कि यह प्रस्ताव रखते हुए में गर्वका अनुभव कर रहा हूँ। आजका दिन भारतीयोंके लिए गौरवका दिन है कि आप सबने ब्रिटिश भारतीय संघके आमन्त्रणको मान देकर हमारे देशके एक प्रख्यात व्यक्ति और, जैसा कि पहले कई वक्ताओंने कहा है, इस साम्राज्यके--जिसमें हम सभी शामिल हैं--सुयोग्य नागरिकका सम्मान करनेके लिए यहाँ इतने मनःपूर्वक पधारनेकी कृपा की है। संघर्षकी पराकाष्ठाके अवसरपर बनाई गई इस समितिके[२] प्रति श्री गोखलेने स्वयं ही अपनी कृतज्ञता व्यक्त की थी। चूंकि समितिने निस्सन्देह ब्रिटिश भारतीयोंकी अन्यतम सेवा की है, इसलिए मेरी समझमें इसने साम्राज्यकी भी अन्यतम सेवा की है। इस समितिके निर्माणसे अपनी अन्तरात्माकी खातिर संघर्ष करनेवाले लोगोंमें एक नई आशाका संचार हुआ था। जिस परिस्थितिमें और जिस अवसरपर इस समितिका निर्माण हुआ था, दक्षिण आफ्रिकाका भारतीय समाज उसे कभी नहीं भूलेगा। हमने अबतक कई सम्मान-भोजोंका आयोजन किया है और उनमें हमारे प्रति मंत्री और सहानुभूतिके भाव रखनेवाले बहुत-से यूरोपीय सम्मिलित भी हुए हैं, लेकिन मुझे एक भी ऐसा अवसर याद नहीं पड़ता जब हमारे विनम्र आमन्त्रणपर दक्षिण आफ्रिकाके
- ↑ ब्रिटिश भारतीय संघ द्वारा आयोजित यह भोज गोखलेके सम्मान में दिये भोजोंमें सबसे बड़ा था। उसमें लगभग ५०० व्यक्ति सम्मिलित हुए थे और उसकी अध्यक्षता मेयर एलिसने की थी। इस अवसरपर वेनगोल्ड और न्यूमैनने श्री गोखलेको भोजन तालिका छपा हुआ एक साटनका कपड़ा भेंट किया था।
- ↑ देखिए "अभिनन्दनपत्र : डब्ल्यू॰ हॉस्केनको", पृष्ठ १०१।