२९५. भाषण : डर्बन में गोखलेके स्वागत समारोह में[१]
[नवम्बर ८, १९१२]
किसी न किसी प्रकार मतदाताओंकी सूचीके एक कोने में मेरा नाम भी स्थान पा गया है। यही कारण है कि मैं आप सभी सज्जनोंको, जिनमें गोरे भी उपस्थित हैं, मेरे नागरिक बन्धु कहकर सम्बोधन कर रहा हूँ।[२]
श्री गांधीने कहा कि भारतके ही करोड़ों जन नहीं, इंग्लैंडकी भी जनता श्री गोखलेको महान् राजनीतिज्ञ मानती है। वाइसरॉय तक अनुरोधपूर्वक उनसे सलाह लेते रहे हैं; और यह इसलिए कि श्री गोखले भारतकी नब्ज पहचानते हैं। उन्होंने भारतकी राष्ट्रीय कांग्रेसकी चर्चाओं में उसका मार्गदर्शन किया है। उनकी गिनती देशके महानतम शिक्षाविदों में होती है। यदि वे इंग्लैंड में पैदा हुए होते तो आज वे श्री ऐस्क्विथके पदपर आसीन होते। यदि वे अमेरिकामें पैदा हुए होते तो वे शायद डॉ॰ वुडरो विल्सनके पदके लिए चुन लिये जाते; और यदि उनका जन्म ट्रान्सवालमें हुआ होता, तो वे जनरल बोथाके पदपर होते। आगे चलकर श्री गांधीने अपने देशवासियोंको चेतावनी देते हुए कहा कि हम लोगोंको आशाके बड़े ऊँचे-ऊँचे महल खड़े नहीं कर लेने चाहिए। हमें अभी आन्दोलन तो करना ही पड़ेगा। हम जिन अधिकारोंकी माँग कर रहे हैं वे तो श्री गोखले हमें नहीं दे सकते। सम्भव हैं, उनकी प्राप्तिके लिए हमें अभी जेल जाना पड़े। श्री गोखलेको हमने जो मानपत्र दिये हैं वे भविष्य में उनसे कुछ पाने की प्रत्याशासे प्रेरित होकर नहीं, बल्कि हमारे बीच उपस्थित इस व्यक्तिके महान् चरित्रके प्रति हमारी सम्मानांजलिके रूपमें भेंट किये गये हैं।
- [अंग्रेजीसे]
इंटरनेशनल प्रिंटिंग प्रेस, फीनिक्स द्वारा प्रकाशित 'ऑनरेबल मि॰ जी॰ के॰ गोखलेज विज़िट टु साउथ आफ्रिका, १९१२' से।