२९८. पत्र : मगनलाल गांधीको
[लॉली
नवम्बर १७, १९१२ के आसपास][१]
तुम्हारा पत्र मिला।
मुझे प्रोफेसर गोखलेके भाषण श्री कैलेनबैकके पास नहीं मिले। वहाँ स्टेशनपर, खोई हुई वस्तुओंसे सम्बन्धित कार्यालयमें जाकर पूछताछ करना। सम्भव है कि एक पूरा बंडल ही वहाँ रह गया हो। उस बंडलपर उस दिनकी तारीख है जिस दिन मैं रवाना हुआ था।
महम्मद कासिम कमरुद्दीनसे[२] विज्ञापनके सम्बन्ध में बातचीत करना। वह जो उत्तर दे वह मुझे लिख भेजना।
दादा सेठसे पूछकर पता चलाना कि लड़कोंको पाठशालामें[३] नहीं आने दिया जाता, इसके सम्बन्धमें क्या किया जा रहा है। तुम्हें श्री सुब्रह्मण्यम्से[४] भी हर
सप्ताह समाचार प्राप्त करके प्रकाशित करते रहना चाहिए। और यदि श्री पॉलकी मार्फत ऐसा करो तो तुम उनके [श्री सुब्रह्मण्यम् के] सम्पर्क में रहकर महत्वपूर्ण समाचार प्राप्त करते रह सकोगे। इसमें समय जायेगा, यह तो मैं समझता हूँ। लेकिन इसे अवकाशके समय करना चाहिए। और यह तभी हो सकता है जब फीनिक्समें परस्पर प्रेमका वातावरण हो। वह कैसे सधेगा, इसका उत्तर तो तुम सबके हाथमें है और इसकी जिम्मेदारी भी तुम सभीपर है।
- ↑ अनुच्छेद २ में श्री गोखलेके जिन भाषणोंकी चर्चा की गई है वे सम्भवतः वही थे जो उन्होंने अपनी दक्षिण आफ्रिका यात्राके दौरान अक्तूबर २२, १९१२ तथा नवम्बर १२, १९१२ के बीच दिये थे। गांधीजी, जो यात्राके दौरान सारे समय श्री गोखलेके साथ थे, ८ नवम्बरको डर्बन पहुँचे। (देखिए "डायरी १९१२" में इस तारीखकी टीप), और २२ नवम्बरको वहाँसे रवाना हुए। चूँकि यह पत्र मगनलाल गांधीको, जो फीनिक्स प्रेसमें काम करते थे, लिखा गया है--भाषण फीनिक्स अथवा डर्बनमें खो गये होंगे। गांधीजी टॉल्स्टॉय फार्मपर--शायद अपने दौरेके अन्तमें--१५ नवम्बरको पहुंचे थे। श्री गोखलेकी दक्षिण आफ्रिका यात्राकी स्मृतिमें फीनिक्स से एक पुस्तक प्रकाशित की गई थी जिसमें उनके भाषणोंका संकलन था। इस पुस्तककी श्री पोलक द्वारा लिखी भूमिकापर २० नवम्बर, १९१२ की तारीख पड़ी हुई है। इसलिए सम्भव है कि यह पत्र १६ अथवा १७ नवम्बर को लिखा गया था। इसी तारीखको गांधीजी श्री गोखलेको विदा करनेके लिए लौरेंको माक्विस रवाना हुए थे।
- ↑ डर्बनके एक भारतीय व्यापारी।
- ↑ डर्बनमें एच॰ एल॰ पॉल द्वारा संचालित एक भारतीय शैक्षणिक संस्था।
- ↑ नेटालके एक भारतीय शिक्षा शास्त्री जिन्होंने स्कूलके विषय में गांधीजीसे परामर्श किया था।