३७४. एस्टकोर्टमें परवाना-सम्बन्धी मुकदमा
हमें जब परवाना (लाइसेंसिंग)-अधिकारी कष्ट नहीं देते तब जान पड़ता है गोरे व्यापारी वैसा करनेपर कमर कस लेते हैं। परवाना-अधिकारीने श्री खमीसा इब्राहीमको परवाना दे दिया था, इसलिए आस-पासके गोरे व्यापारियोंने परवाना-निकाय (लाइ-सेंसिंग बोर्ड) से अपील की। निकायके सदस्योंने भारतीय व्यापारीके विरुद्ध मत प्रकट किया, इसपर श्री खमीसाके वकीलने उनके विरुद्ध आपत्ति उठाई। किन्तु आपत्ति अस्वीकार कर दी गई और निकायने परवाना-अधिकारीका फैसला बदल कर श्री खमीसाका परवाना नामंजूर कर दिया। हमारा विश्वास है कि श्री खमीसा अपना मामला आगे ले जायेंगे। ये सब मामले लॉर्ड ऍम्टहिलकी समिति के सामने भी जाने चाहिए, जिससे ब्रिटिश सरकारसे इन मामलोंमें न्याय प्राप्त किया जा सके।
- [गुजरातीसे]
- इंडियन ओपिनियन, २९-३-१९१३
३७५. क्या सीरियाई एशियाई हैं।
सीरिया एशियाका एक प्रदेश है, इसलिए सीरियामें रहनेवाले भी एशियाई ही हैं और उनपर १८८५ का एशियाई कानून लागू होना चाहिए--ऐसी दलील देकर पंजीयकने जोहानिसबर्ग में एक सीरियाईके नाम जमीनकी रजिस्ट्री करनेसे इनकार कर दिया। इसपर उक्त सीरियाईने सर्वोच्च न्यायालय में अर्जी दी है कि उसके नाम जमीन दर्ज की जानी चाहिए। उसकी दलील यह है:
"यह ठीक है कि मेरा जन्म एशियामें हुआ है। परन्तु मैं ईसाई हूँ। मेरी चमड़ी सफेद है। इस देशके कानून निर्माताओंकी यह इच्छा कभी नहीं रही होगी कि १८८५ का कानून मुझपर--किसी गोरे एशियाई ईसाईपर--लागू हो। यदि यह मुझपर लागू हो तो एशियाई गोरे यहूदियोंपर भी लागू होना चाहिए। परन्तु यह कानून यहूदियोंपर लागू नहीं किया गया है। फिर, यदि १८८५ का कानून मुझपर लागू हो तो १९०७ का पंजीयन कानून भी लागू होगा। और यदि यही निर्णय हो तो उसका परिणाम ऐसा निकलेगा जिसकी कल्पना कानूनके निर्माताओंने कभी न की होगी।"
इस मुकदमेकी सुनवाई करनेवाले जजने मामलेको महत्वपूर्ण बताकर अपना निर्णय अभी स्थगित रखा है। मामला बेशक महत्वपूर्ण है। इसका परिणाम जाननेकी प्रतीक्षा सभी भारतीय उत्सुकतापूर्वक करेंगे। यदि जज कानूनका वही अर्थ करेगा जो उसके शब्दोंसे निकलता है तो एशियाई सीरियाई भले ही ईसाई हों और उसका रंग भी गोरा हो, किन्तु उनकी गिनती हमारी ही पंक्ति में होगी।
- [गुजरातीसे]
- इंडियन ओपिनियन, २९-३ - १९१३