३७६. आरोग्यके सम्बन्ध में सामान्य ज्ञान [-१३]
[खुराक-चालू]
अब वनस्पति में से कौन-कौन-सी-चीजें त्याग देने योग्य हैं, इसका विचार हमें करना चाहिए। भारतमें प्रायः सर्वत्र मिर्च तथा उसके साथ आवश्यक अन्य मसाले, जैसे कि धनिया, जीरा, काली मिर्च आदि खानेका बड़ा रिवाज है। यह रिवाज दूसरे देशों में इतना अधिक नहीं है। यहाँके सीदियों को यदि हम अपना मसालेदार खाना दें तो वे एकाएक उसे नहीं खा सकेंगे; वह उन्हें बेस्वाद लगेगा। बहुतेरे गोरे, जिन्हें मसालेदार भोजनकी आदत नहीं है, हमारा चटपटा भोजन बिलकुल नहीं खा सकेंगे, और यदि मजबूरी में खा लें तो उनका पेट खराब हो जायेगा और उनके मुँह में छाले आ जायेंगे। अनेक गोरोंके विषयमें यह मेरा अपना अनुभव है। इसके आधारपर इतना तो कहा ही जा सकता है कि मसाले स्वयं स्वादिष्ट हों, यह बात नहीं है; चूंकि एक लम्बे अरसे से हम आदत डाले हुए हैं, अतः उनकी गंध और उनका स्वाद हमें पसन्द आता है। पर यह तो हम जान चुके हैं कि निरे स्वाद के लिए खाना आरोग्यके लिए हानिप्रद है।
अब हम मसालेके सेवन के [अन्य] हेतुकी जाँच करें। मसाले खानेका अन्य हेतु केवल यह है कि उससे अधिक खाने में मदद मिलती है और अधिक खुराक पच भी जाती है। मिर्च, धनिया, जीरा आदिमें पेटकी जठराग्निको प्रदीप्त करनेका गुण है, और उनके कारण हमें अधिक भूख लगती प्रतीत होती है। किन्तु भूख लगनेका अर्थ यदि यह किया जाये कि खाया हुआ पूर्ण रूपसे पच गया और उसका ठीकसे [रस] रक्तादि बन गया तो यह विचार केवल भ्रममूलक होगा। कई लोग बड़ा मसाला खाते हैं, किन्तु उनका पेट अन्ततोगत्वा बहुत नाजुक हालतमें पहुँच जाता है और कइयोंको संग्रहणी हो जाती है। एक मनुष्यको मिर्च खानेकी बहुत आदत थी। वह उसका सेवन नहीं छोड़ सका और छः माह तक बीमारी भोगकर जवानीमें ही चल बसा। अपनी खुराकमें से सारे मसालोंको निकाल देना अत्यन्त अनिवार्य है।
यह सारा विवेचन जो मसालोंके लिए है, नमकपर भी लागू होता है। यह बात बहुतोंको नहीं जंचेगी, कई लोगोंको एकदम विचित्र लगेगी, पर यह है अनुभव-सिद्ध। विलायत में एक समाज है; उसका मत तो यह है कि नमक तो मसालोंसे भी बढ़कर हानिकारक है। हमें अपनी खुराकमें ही वनस्पतिजन्य लवण मिल जाता है। [वास्तव में] हमें उसीकी जरूरत है और उतना भर सिर्फ काफी है। किन्तु समुद्री नमक या अन्य किसी प्रकारका नमक तो अनावश्यक वस्तु है। और [इसीलिए] जैसे शरीरमें जाता है वैसे ही पसीनेके जरिये या अन्य प्रकारसे निकल आता है। मतलब यह कि उसका कोई खास उपयोग शरीरके लिए होता नहीं जान पड़ता। किसी पुस्तकमें तो इस हद तक लिखा है कि नमक खानेसे हमारा खून दूषित होता है और जिसने