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फाल्गुन वदी ७ [ मार्च २९, १९१३]
चि० जमनादास,
तुम्हारे तीन पत्र साथ मिले हैं। तुम हर हफ्ते पत्र चाहते हो; किन्तु हर हफ्ते मुझे तुम्हारा पत्र मिलता नहीं। इसलिए ऐसा कैसे करूँ, यह समझमें नहीं आता । फिर भी अधिक बार लिखनेका प्रयत्न करूँगा ।
छः मासकी अवधि पूरी होनेके बाद तुम्हें बिना नमकका खाना जारी रखनेकी जरूरत नहीं है । उद्देश्य यह नहीं है कि बिना नमकके खाने [ का नियम निबाहने] के लिए शरीरकी आहुति दे दी जाये । बिना नमक और चीनीका खाना खाकर हम अधिक नीरोग रह सकेंगे, ऐसा मानकर हमने यह व्रत लिया है। यदि ऐसा न हो तो हम नमक या चीनी त्यागने के लिए बंधे नहीं हैं। बिना नमकका खाना निरामिष आहारकी तरह कोई धर्म-विहित बात नहीं है । जब हम ऐसा मानेंगे कि वह है, तब उसे न खायेंगे । दूधके सम्बन्धमें अवश्य मेरा मन वैसा होता है । परन्तु मुझे तो बिना नमक, चीनी, शाक और दालका खाना, ये सब मुआफिक आ गये जान पड़ते हैं।
तुम वहाँ नीबू आदि नहीं खा पाते, यह बात मुझे कुछ रुची नहीं । तुम्हारे प्रयोगोंमें मुझे बहुत-सी खामियाँ दिखाई देती हैं। इसमें तुम्हारा दोष तिल-भर भी नहीं है। तुम अनजान होनेसे फेरफार नहीं कर पाये। इसके अतिरिक्त तुमसे स्वतन्त्र प्रयोग नहीं करते बनता। इसलिए यदि तुम अभीतक अलोना खाने आदिका प्रयोग कर रहे हो और वह तुम्हें अनुकूल न पड़ रहा हो तो उसे छोड़ ही देना ।
तुम मेरे पत्रोंको सँभालकर रख सको, इसके लिए तुम्हें पत्र लिखने में एक ही प्रकारके कागजका प्रयोग करनेका प्रयत्न करूँगा । कुछ पत्र अवश्य ही दुबारा पढ़ने योग्य होंगे। इसके अलावा तुम मेरे विचार जाननेके लिए बहुत उत्सुक जान पड़ते हो, इसलिए यदि तुम्हें मेरा पत्र हर हफ्ते न मिले, तो जो पत्र सबसे हाल में मिला हो उसे तो इस बीच दुबारा पढ़ ही सकोगे ।
मुझसे चाहे जो सवाल, चाहे जैसी भाषामें पूछने में न झिझकना ।
तुम मेरे मना करनेपर भी [भारत] चले गये हो, इसकी चिन्ता न करो। तुम अकेले रहकर अपने विचारोंको दृढ़ नहीं कर सकते। इसी कारण मैंने तुम्हें रोका था। परन्तु खुशालभाई' और देवभाभीकी सेवा करनेकी तुम्हारी तीव्र इच्छा देखकर मुझे उसकी तुलना में तुम्हारे विचारोंको दृढ़ करनेकी अपनी इच्छा गौण लगी ।
१. पत्रसे स्पष्ट है कि यह जमनादास गांधीके १४ दिसम्बर, १९१२ को दक्षिण आफ्रिकाले भारतके लिए रवाना होनेके बाद ही लिखा गया होगा; और इस तारीखके बाद पड़नेवाली फाल्गुन वदी ७ को १९१३ के मार्च महीनेकी २९ तारीख थी । २ और ३. जमनादासके माता-पिता ।