सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 11.pdf/५६८

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ अभी शोधित नहीं है।

परिशिष्ट १० गांधीजीके नाम कॉर्डिजका पत्र [ अडयार नवम्बर १२, १९११ ] प्रिय श्री गांधी, न्यासपत्र भेज रहा हूँ । उसमें गवाहों तथा न्यासकर्ताके हस्ताक्षर विधिवत् हो चुके हैं । मैं १६ दिसम्बरको कलकत्तेसे गुजर रहा हूँ। मैंने श्री नटेसनको पत्र लिखकर उनसे पूछा है कि क्या प्राचीन आर्यावर्तकी भूमिपर मुझे आपसे दुआ सलाम करनेका अवसर मिल पायेगा । चूँकि हम आपसमें अभिन्न हैं इसलिए आशा है इससे आपको उतनी ही प्रसन्नता होगी जितनी मुझे । यदि मैं अपने मनकी बात आपसे कहूँ तो कहना होगा कि जहाँतक प्रकट सद्गुणोंका सवाल है मुझे आप जैसा कोई व्यक्ति नहीं मिला । मेरी समझमें बालक कृष्ण आपके समकक्ष हैं। माधुर्यमें तो वे आपसे भी बढ़े- चढ़े हैं, परन्तु मैं तो सयानोंकी बात कर रहा था । आप रहस्यवादी हैं और फिलहाल जिन्हें जानने और जिनसे प्रेम करनेका सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ है वे लोग हैं चमत्कारवादी (ऑकल्टिस्ट) जिन्हें चमत्कार दिखाई पड़ते हैं और जिनका उसके बिना काम ही नहीं चलता । प्रिय बन्धु डॉ० भी आपकी तरह सच्चे रहस्यवादी हैं । उन्हें चमत्कार (विजन) इत्यादिसे घृणा है । क्या ही अच्छा होता यदि वे भी आपकी तरह विशाल हृदय होते ! अस्तु ! पूर्वं इसके कि और यह पत्र आपके हाथ तक पहुँचे, हम लोगोंकी भेंट कलकत्ते में ही हो जायेगी । यदि लोग इस पत्रके द्वारा एक-दूसरेसे स्नेह मिलन कर रहे हैं। साथ फीनिक्स में सुखपूर्वक मनायें । आप लौटे ऐसा न हो पाया तो यह मानियेगा कि हम ईश्वर करे आप बड़ा-दिन प्रिय कैलेन बैकके [ पुनश्च : ] - आपका भाई, जॉन एच० कॉडिज़ चि० मणिलाल, रामदास, देवदास, मगनलाल, अन्य लोगों – श्रीमती गांधी एवं सभी स्त्री-बच्चोंको मेरा स्नेहाभिवादन कहें । मूल अंग्रेजी प्रति (एस० एन० ५५९२) की फोटो नकलसे । १. अभिप्राय जे० कृष्णमूर्तिसे है । २. शब्दावली स्पष्ट नहीं है । Gandhi Heritage Portal