परिशिष्ट ५४९ निर्धारित जुर्माने अथवा कैदका भागी होगा । (प्रथम अपराधके लिए अधिक से अधिक २५ पौंड या जुर्माना; इसे न देनेपर अधिक से अधिक तीन मासकी या सादी कैद की सजा, और उसके बादके अपराधोंपर जुर्मानेकी रकम या कारावासको अवधि हर बार दुगनी होती चली जायेगी । [ अंग्रेजीसे ] इंडियन ओपिनियन, ३-२-१९१२ परिशिष्ट १४ गांधीजीके नाम गृह-सचिवका तार जनवरी ३१, १९१२ बात है; कोई भी अधिकारीके हाथ में सकता है; किन्तु अधिकारों में वर्तमान आपके कलके तारके सिलसिले में : जहाँतक खण्ड पाँचकी कानूनी अधिकार नहीं छिनते, क्योंकि किसी भी हालत में विवेकाधिकार तो रखना ही होगा I उसके निर्णयको निकाय बदल सबसे अंतिम निर्णयका अधिकार मन्त्रीको होगा । खण्ड ७ के अन्तर्गत कोई फर्क नहीं पड़ता; क्योंकि अन्तर्प्रान्तीय प्रवास अब भी प्रशासनिक विवेकाधिकारका विषय रहेगा । परन्तु निःसन्देह यह बात अच्छी तरह समझ ली गई है कि जहाँतक सम्भव होगा इस प्रकारके प्रवासको बहुत सीमित रखा जायेगा । आपको मालूम ही है कि यह वही नीति है जिसे वर्तमान प्रवासी अधिनियमों के अन्तर्गत अमल में लाया गया था 1 रही नेटालमें अधिवास प्रमाणपत्रोंकी बात, उन्हें जारी करना वैकल्पिक था और उनके दुरुपयोगको शिकायतें मन्त्रीके पास बराबर आती रही हैं पंजीयनकी प्रणालीके । प्रमाणपत्र ऐसे । अधिवास सम्बन्धी प्रमाणपत्र देते रहना लोगोंके पास पहुँचवा दिये जाते हैं बिना किसी शिनाख्त और असम्भव है, क्योंकि अक्सर ये जो उनके अधिकारी नहीं हैं। अन्य प्रान्तों में तो है भी नहीं 1 मन्त्री महोदयको विश्वास है कि प्रणालीको सही ढंगसे अमल में लाया जाये तो इससे उन भारतीयों को होगा जो लम्बे या थोड़ असके लिए अपने देशकी या हैं । खण्ड २८ के बारेमें कहना यह है कि ज्ञापन देना केवल इसलिए रखी गई है जिससे फ्री स्टेटमें प्रविष्ट व्यवसाय में हाथ न डाल सके । ऐसी परिस्थिति में इसके विरुद्ध क्या आपत्ति हो सकती है। कि एशियाई लोग उस प्रान्त में कृषि इस आशयका ज्ञापन लेना भी उचित अनुमतिपत्रोंकी जो प्रणाली केपमें लागू है वह संघके केपमें भी इस अवश्य संतोष अन्य देशोंकी यात्रा करना चाहते प्रवालकी शर्त नहीं है । वह तो होनेवाला व्यक्ति खेती-बाडी. व्यापार- मन्त्री महोदय नहीं समझते कि यदि यह बात उचित मानी जाती है अथवा व्यापार न करें, तो ऐसी स्थिति में उनसे ही है 1 टाइप की हुई अंग्रेजी प्रति (एस० एन० ५६१९ ) की फोटो नकलसे । Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 11.pdf/५८७
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