परिशिष्ट ५५१ सूचनार्थं भेज दूँ । आपको स्मरण होगा कि उस समय यह स्पष्ट नहीं था कि क्या धारा जिस रूपमें पेश की गई थी उसकी व्यवस्थाओंके अन्तर्गत भी शिक्षित एशियाई प्रवासियोंको वैसा हलफनामा देना अनिवार्य होगा, जैसा कि ऑरेंज फ्री स्टेट कानूनके परिच्छेद ३३ के खण्ड ८ के अन्तर्गत अपेक्षित है; और विभागने किसी निश्चित निर्णयपर पहुँचनेसे पहले उसपर विचार करने की बात कही थी । अब विचार कर लिया गया है और इस पत्रके साथ जो मसविदा भेजा जा रहा है वह विधेयक में इस समय मौजूदा धाराके स्थानपर रखनेकी दृष्टिसे ही तैयार किया गया है, जो इस पत्रके साथ भेजा जा रहा है। कानूनी सलाहकारोंका मत है कि यदि हलफनामेसे सम्बन्धित व्यवस्थाएँ विधेयक में सम्मिलित कर ली जाये तो परिच्छेदकी अनुसूची २ में उल्लिखित हलफनामा पूरा करनेकी आवश्यकता नहीं रह जाती । आपने अधिवासका जो प्रश्न उठाया है उसके सम्बन्धमें मुझे यह कहना है कि मन्त्री महोदय एक और धारा जोड़ना चाहते हैं, जो इसके बारेमें सभी सन्देह दूर कर देगी और इसलिए जिसे आपकी सहमति प्राप्त हो जायेगी । मन्त्री महोदय बहुत शीघ्र ही यह विधेयक " असेम्बली " में पेश करनेवाले हैं, इसलिए यदि आप अपने पास भेजे गये इस संशोधनके बारेमें अपने विचार जल्द ही भेज दें तो मुझे बदी प्रसन्नता होगी । आपका, अर्नेस्ट एफ० सी० लेन टाइप की हुई मूल अंग्रेजी प्रति (एस० एन० ५६५० १) की फोटो नकलसे । परिशिष्ट १७ संघ-संसद में प्रवासी प्रतिबन्धक विधेयक (१९१२) के सम्बन्ध में स्मट्सका भाषण केप टाउन, मई ३०, १९१२ प्रतिबन्धक विधेयकको द्वितीय दिया गया था कि विधेयककी उनकी रायसे प्रतिवेदन बड़े गृह मन्त्रीने पिछले महीनेकी ३० तारीखको विधान सभामें प्रवासी वाचनके लिए प्रस्तुत किया था । उन्होंने कहा कि तपेदिक आयोगको कह दृष्टिसे महत्व रखनेवाले प्रश्नोंके बारेमें वह अपना प्रतिवेदन पहले ही दे दे। कामका और सभा शायद कानून बननेसे पहले ही उसकी कुछ सिफारिशें आंशिक रूपसे स्वीकार कर लेगी। हालाँकि विशुद्ध दक्षिण आफ्रिकी दृष्टिकोणसे विधेयक अत्यधिक अविलम्बनीय महत्त्व नहीं रखता, फिर भी व्यापकतर दृष्टिकोणसे तो वह महत्त्वपूर्ण और अविलम्वनीय है ही । इस विधेयकमें जिन प्रश्नोंको हल किया गया है, वे साम्राज्यके लिए बड़ा महत्व रखते हैं। यह विधेयक एशियाइयोंके और दक्षिण आफ्रिकामें एशियाइयों, विशेषकर भारतीयोंके प्रवासके सम्बन्धमें ब्रिटिश सरकारके साथ १९१० में ही तय की गई कुछ बातोंको लागू करने और उनको कानूनमें शामिल करनेके लिए तैयार किया गया है । मन्त्रीने कहा कि यह विधेयक दक्षिण आफ्रिकामें केवल गोरोंके प्रवासकी ही नहीं बल्कि उससे कुछ भिन्न तथा अधिक पेचीदा एशियाइयोंके प्रवासकी समस्यासे भी सम्बन्ध रखता है । दक्षिण आफ्रिकाकी एशियाई जनता - विशेषकर भारतीय जनताने अपना एक दृष्टिकोण बना लिया है और इसमें उसे इंडिया ऑफिस तथा ब्रिटिश सरकार दोनों ही का समर्थन प्राप्त है । अपने इस दृष्टिकोणके अनुसार वह दावा करती है। कि उसमें और गोरी जनतामें कोई भेद नहीं किया जाना चाहिए । भारतीय जनता प्रशासनिक कार्यों या Gandhi Heritage Porta
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 11.pdf/५८९
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