परिशिष्ट ५५५ करें । इन बोर्डों का गठन इस प्रकार किया जायेगा कि वे अपीलोंपर निष्पक्ष और न्यायपूर्ण ढंगसे विचार कर सकें । विधेयकमें कुछ संशोधन आवश्यक होंगे, जैसे कि यह संशोधन कि दक्षिण आफ्रिकाका अधिवासी बन जानेवाले व्यक्तिको न्यायालय में अपील करनेकी अनुमति होनी चाहिए । मन्त्रीने विधेयकको द्वितीय वाचनके लिए प्रस्तुत किया । ( हर्ष-ध्वनि । ) [ अंग्रेजीसे ] इंडियन ओपिनियन, ८-६-१९१२ परिशिष्ट १८ अस्थायी समझौते के सम्बन्धमें लॉर्ड सभामें लॉर्ड ऍम्टहिलका भाषण - लन्दन जुलाई १७, १९१२ लॉर्ड महोदयो, मैं लम्बा भाषण देकर आपका समय नष्ट नहीं करना चाहता, परन्तु मुझे अपने नामसे पेश हुए प्रश्नकी सफाईमें कुछ शब्द तो कहने ही पड़ेंगे। मुझे विवश होकर यह प्रश्न पूछना पड़ा है; क्योंकि दक्षिण आफ्रिकामें ब्रिटिश भारतीयोंके साथ होनेवाले बरतावके इतने अधिक महत्त्वपूर्ण प्रश्नके बारेमें मन्त्री महोदयले जानकारी हासिल करनेका अन्य कहीं कोई दूसरा मौका नहीं मिल सकता था। आपको स्मरण होगा कि मन्त्री महोदय कामन्स सभाके सदस्योंको साम्राज्यीय उपनिवेशोंके दौरे- पर ले गये थे । दौरा इतना दिलचस्प था और इतना लम्बा था कि उसे और अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता था । हममें से जो लोग पिछले कुछ वर्षोंसे इस प्रश्नमें दिलचस्पी रखते आ रहे हैं, वे आजकल अत्यन्त चिन्तित हो उठे हैं । हमारी चिन्ताके दो कारण हैं - पहला तो यह कि भूतपूर्वं उपनिवेश मन्त्रीने इतने अर्से पहले जिस समझौतेको कार्यान्वित करनेका वचन इतने निश्चित और आशापूर्ण शब्दोंमें दिया था उसे इस बार फिर स्थगित कर दिया गया है; और दूसरा यह कि उस समझौतेको कार्यान्वित करनेका भार अब दूसरे लोगोंपर है। जनरल स्मट्स, जो पहले गृह-मन्त्री थे, इस समझौतेको अमलमें लानेके लिए वचनबद्ध थे, क्योंकि इसे, जैसा कि हमारा विश्वास है, दक्षिण आफ्रिकाका भारतीय समाज ही नहीं, सम्राटको सरकार और भारत सरकारने भी सन्तोषप्रद मानकर इससे सहमति प्रकट की थी । परन्तु अब दुर्भाग्यवश विधेयकको स्थगित कर दिया गया है, और गृह-मन्त्रीके पदपर भी अब एक दूसरे सज्जन, मेरा ख्याल है कि श्री फिशर, विराजमान हैं। और उनके सम्बन्धमें हम जानते हैं। कि दुर्भाग्यवश ब्रिटिश भारतीय समाजके प्रति उनका रुख - मैं इतना ही कहूँगा - 1- जनरल स्मटससे कम ही मैत्रीपूर्ण हैं । हम बहुत ही स्पष्ट रूपसे यह जानना चाहेंगे कि क्या नये गृह मन्त्रीके आनेसे समझौतेकी स्थितिमें कोई अन्तर पड़ेगा, और साथ ही निःसन्देह यह भी कि इस समझौतेको स्थगित करनेका ठीक-ठीक कारण क्या है । माननीय सदस्योंको याद होगा एक सालसे भी अधिक समय पहले उन लोर्ड महोदयने, जो इस सभाके नेता और उन दिनों मन्त्री पदपर थे, हमें पूरे विश्वासके साथ आशापूर्ण शब्दोंमें आश्वस्त किया था कि समझौता शीघ्र ही होनेवाला है और उनको सचमुच पूर्ण विश्वास था कि समझौता हो ही जायगा । मैं आपको यह भी याद दिला दूँ कि समझौता क्या था । समझौतेका सार यह अधिनियम २ रद कर दिया जायेगा, क्योंकि वह दक्षिण अफ्रिकाके हमारे सहयोगी भारतीय नागरिकोंकी भावनाओंको इतनी अधिक ठेस पहुँचाता है । वह अधिनियम सर्वथा अनुपयोगी है और दक्षिण आफ्रिकाके भारतीयोंका अपमान करना और उनकी भावनाओंको था कि १९०७ का ट्रान्सवाल Gandhi Heritage Porta
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 11.pdf/५९३
दिखावट