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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 11.pdf/६२१

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तारीखवार जीवन-वृत्तान्त

अप्रैल १५ : एल० डब्ल्यू ० रिचने गांधीजीके जोहानिसबर्ग कार्यालय में वकालत शुरू की।

अप्रैल १७ : जोज़ेफ़ रायप्पन, लिअंग क्विन तथा दूसरे सत्याग्रही जेलसे छोड़े गये।

अप्रैल १९ : स्मट्सने एक भेंटमें अपना दृष्टिकोण स्पष्ट करते हुए गांधीजीको बताया कि वे वर्तमान या आगामी अधिवेशन में संघ प्रवासी प्रतिबन्धक विधेयक पास कर देंगे।

अप्रैल २० : ई० एफ० सी० लेनको सूचित किया कि ट्रान्सवालकी समस्या हल होनेतक नेटाल भारतीय कांग्रेस, ब्रिटिश भारतीय संघ तथा केपके भारतीय सत्याग्रह समाप्त करनेके लिए तैयार नहीं हैं। और आशा व्यक्त की कि उनका वैकल्पिक हल अब भी इस अधिवेशन में स्वीकार कर लिया जायेगा।

अप्रैल २१ : लेनने गांधीजीको सूचना दी कि सरकार मौजूदा अधिवेशन में संघ प्रवासी प्रतिबन्धक विधेयकपर विचार नहीं कर सकी। सरकार विश्रान्तिकी अवधि में इसे हल करनेके बारेमें सावधानीसे विचार करेगी। इस बीच भारतीयोंको सत्याग्रह स्थगित कर देना चाहिए।

गांधीजी लेनसे मिले और उन्हें बताया कि यदि कुछ आश्वासन दिये जायें तो सत्याग्रह स्थगित किया जा सकता है। लेनने स्मट्सको टेलीफोन किया और वे कुछ आश्वासन देनके लिए राजी हो गये।

अप्रैल २२ : गांधीजीने पत्र लिखकर ई० एफ० सी० लेनको सूचना दी कि यदि स्मट्स कुछ आश्वासन दे दें तो सत्याग्रह स्थगित हो सकता है।

उपर्युक्त इरादेके उत्तरमें स्मट्सने लिखा कि वे आगामी अधिवेशनमें एक कानून पेश करेंगे जो (क) इस विचारसे कि नाबालिग बच्चोंके अधिकार सुरक्षित रहें, १९०७ के अधिनियम २ को रद करेगा; (ख) सभी प्रवासियोंको कानूनी समानता देगा; ऐसे सत्याग्रहियोंको पंजीयनका अधिकार देगा जो सत्याग्रह न करते तो १९०८ के अधिनियमके अनुसार उसके अधिकारी होते; (ग) शिक्षित सत्याग्रहियों के अस्थायी प्रमाणपत्रोंको (वर्ष में ५ या ६ से अधिक नहीं) नियमित करनेका अधिकार देगा। स्मट्सने यह भी लिखा कि यदि गांधीजी सत्याग्रह स्थगित करने का आश्वासन दें तो वे गवर्नर जनरलसे सत्याग्रही बन्दियोंको मुक्त करनके सम्बन्धमें अनुकूल विचार करनेके लिए कहेंगे।

न्यायालय द्वारा रम्भाबाई सोढाकी अपील खारिज।

अप्रैल २४ : किम्बर्लेकी भारतीयोंकी सभा में बोलते हुए गांधीजीने बताया कि अब "कठिन समस्याका हल निकट आ रहा है।"

अप्रैल २५ : स्मट्सने संघ विधान सभामें संघ प्रवासी प्रतिबन्धक विधेयकको वापस लिया।

अप्रैल २६ : गांधीजी जोहानिसबर्ग लौटे।

अप्रैल २७ : जोहानिसबर्गकी भारतीयोंकी सभामें गांधीजीने अस्थायी समझौतेके बारेमें स्मट्सके साथ हुए पत्र-व्यवहारके बारेमें बताया और प्रस्ताव स्वीकार करनेके पक्षमें सलाह दी। सभाने निर्णय किया कि (क) यदि स्मट्स अपने वचन पूरा कर दें तो सत्याग्रह बन्द कर दिया जाये और (ख) गांधीजी व काछलियाके स्थानपर एच० एस० एल० पोलकको इंग्लैंड भेजा जाय।