'इंडियन ओपिनियन'ने घोषणा की कि चीनियोंने अस्थायी समझौतेको स्वीकार करनेके पक्ष में निर्णय किया है।
अप्रैल २८ : गांधीजीने अस्थायी समझौते के सम्बन्ध में 'स्टार'को दी गई भेंटमें घोषणा की कि समझौता हो जानेपर उनका सार्वजनिक जीवनसे अवकाश ग्रहण करनेका इरादा है।
अप्रैल २९ : गांधीजीने ई० एफ० सी० लेनको लिखे पत्र में समझौते की शर्तोंका ब्रिटिश भारतीयों द्वारा लगाया गया अर्थ सूचित किया और स्मट्ससे उसके पुष्टीकरणकी माँग की प्रार्थना की कि आर० एम० सोढाका पंजीयन किया जाये; उस सरकारी नौकरको पुनः नौकरी दिलाई जाये जिसे सत्याग्रहके कारण अलग कर दिया गया था; चीनी बन्दियोंको छोड़ दिया जाये, आदि।
मई १ : ब्रिटिश भारतीय संघने ट्रान्सवालके भारतीयोंकी शिकायतोंके बारेमें उपनिवेश मन्त्रीको याचिका भेजी। उन शिकायतों में १८८५ के कानून ३, स्वर्ण-कानून और बस्ती अधिनियमसे उत्पन्न शिकायतें भी शामिल थीं।
मई ३ : गांधीजीकी स्मट्ससे भेंट।
मई ४ : उन भारतीयों तथा चीनियों के वर्गीकरणके बारेमें ई० एफ० सी० लेनको पत्र लिखा जिनके द्वारा स्वेच्छया पंजीयनके लिए अर्जी दिये जानेकी सम्भावना थी। ३०० पौंड भेजने के लिए धन्यवाद देते हुए ए० ई० छोटाभाईको लिखा। यह रकम छोटाभाईने अपने पुत्रके मामले में की गई व्यावसायिक सेवाके लिए भेजी थी। गांधीजीने फीनिक्सको न्यासिकोंके सुपुर्द करके उक्त रकमका उपयोग वहाँ स्कूलपर करनेका इरादा जाहिर किया।
मई ८ के पूर्व : गांधीजीको सूचना दिये बिना ही हरिलालका भारतके लिए प्रस्थान।
मई ८ : गांधीजीने एच० एस० एल० पोलकको पत्र लिखकर उनकी इंग्लैंड और भारतकी यात्राके खर्चका तखमीना दिया और बताया कि स्मट्सने सत्याग्रहियोंकी माँगों के बारेमें अनुकूल उत्तर दिया है।
पत्र लिखकर डॉ० प्राणजीवन मेहताको सुझाव दिया कि वे नेटालके ६ सत्याग्रहियों को इंग्लैंड में पढ़नेका खर्च दें; वकालत न करनेका अपना निश्चय प्रगट किया।
मई ९ : सत्याग्रहकी सफलतापर भेजी गई बधाईके लिए प्रान्तिक परिषद्को तार द्वारा धन्यवाद दिया।
मई १५ : नेटाल भारतीय कांग्रेसने प्रस्तावित निरंकुश शैक्षणिक कसौटी, प्रवासी प्रतिबन्धक विधेयक वर्तमान अधिकारोंकी काट-छाँट तथा भूतपूर्व गिरमिटिया भारतीयोंपर लगाये गये तीन पौंडी करके सम्बन्ध में उपनिवेश मन्त्रीको स्मृतिपत्र (जिसका मसविदा गांधीजीने तैयार किया था) भेजा।
हरिलाल गांधी डेलागोआ-बे से टॉल्स्टॉय फार्म लौटे।
मई १६ : क्लार्क्सडॉ के भारतीयोंने गृह मन्त्रीसे अपील की कि स्वर्ण-कानून के अन्तर्गत दिये गये नोटिस वापस ले लिये जायें और कानून रद कर दिया जाये।
मई १७ : ट्रान्सवाल नगरपालिका अध्यादेश तथा स्थानीय शासन अध्यादेशके मसविदे सरकारी 'गज़ट' में प्रकाशित किये गये।