मई १८ के पूर्व : हरिलालका अन्तिम रूपसे दक्षिण आफ्रिकासे भारतके लिए प्रस्थान।
मई १८ : गांधीजीने गृह मन्त्रीको लिखा कि २९ अप्रैल, १९११ के पत्र में उन्होंने समझौते के विषय में जो सुझाव दिये थे उनके बारेमें उन्हें स्मट्सका उत्तर चाहिए। ब्रिटिश लोकसभा में स्वर्ण-कानून, बस्ती अधिनियम और ट्रान्सवालके भारतीयोंकी उनसे उत्पन्न कठिनाइयोंके बारेमें प्रश्न पूछे गये।
मई १९ : लेनने गांधीजीको उनके ४ मईके पत्रका उत्तर दिया।
उक्त पत्रके उत्तरमें गांधीजीने कहा कि वे लोग भी १८० एशियाई सत्याग्रहियों में शामिल हैं जो स्वेच्छया पंजीयन प्रणालीके अन्तर्गत अथवा किसी एशियाई कानूनके अन्तर्गत पंजीयनकी अर्जी नहीं दे सके, २९ अप्रैलके उनके पत्र में दिये गये समझौते की शर्तोंके विषय में कोई आपत्ति न होनेके कारण उन्हें स्वीकृत ही समझ लेनेके बारेमें उन्होंने तार द्वारा उत्तर भेजनेकी प्रार्थना की।
गांधीजीने सत्याग्रह द्वारा उपलब्ध शुभ परिणामों तथा ट्रान्सवाल, नेटाल एवं केपमें भारतीयों द्वारा उठाये जानेवाले कष्टोंके बारेमें गो० कृ० गोखलेको लिखा।
मई २० : स्मट्सने तार द्वारा गांधीजीको सूचना दी कि,
(क) १८० भारतीयोंमें वे लोग भी शामिल हैं जो युद्धसे पहले ट्रान्सवाल में तीन साल तक निवासके आधारपर समयपर अर्जी नहीं दे सके थे;
(ख) मौजूदा व्यक्तिगत अधिकारोंको छीना नहीं जायेगा किन्तु भावी सामान्य तथा समान विधानसे विभिन्न प्रान्तोंपर प्रभाव पड़ेगा।
(ग) भावी एशियाई प्रवासियोंके लिए किसी निश्चित शैक्षणिक स्तरकी आवश्यकता नहीं होगी।
(घ) प्रसिद्ध अथवा शिक्षित पंजीकृत एशियाइयोंको परवाने लेनेके लिए अँगूठे या अंगुलियोंकी छाप देनेकी आवश्यकता नहीं।
गांधीजीने ब्रिटिश भारतीय संघकी ओरसे अस्थायी समझौतेकी स्वीकृति की सूचना दी और उन सत्याग्रहियोंकी सूची भेजी जो रिहा होनेको थे।
मई २० के बाद: स्मट्ससे मिलनेवाले शिष्टमण्डलके लिए विवरण तैयार किया।
मई २२ : ब्रिटिश भारतीय संघने 'इंडियन ओपिनियन' में एक नोटिस छापा कि वे भारतीय जो अस्थायी समझौते के अन्तर्गत पंजीयनके अधिकारी हैं, अपने नाम अवैतनिक मन्त्रीके पास भेजें।
मई २३ : गांधीजीने रायटरको दी गई एक भेंटमें अस्थायी समझौते के बारेमें बताया।
मई २६ : एशियाई पंजीयकको पत्र लिखा और उसके साथ अस्थायी समझौते के अन्तर्गत पंजीयन अधिकारी चीनियोंकी सूची और विशेष प्रमाणपत्रोंके लिए तीन मुसलमानोंके नाम भी भेजे।
मई २७ : 'इंडियन ओपिनियन' में लिखते हुए गांधीजीने अस्थायी समझौतेपर सन्तोष व्यक्त किया, किन्तु चेतावनी दी कि यदि स्मट्सने १९०७के अधिनियम २को रद करने और ट्रान्सवाल प्रवासी प्रतिबन्धक अधिनियममें संशोधन करनेके अपने वचनों का पालन नहीं किया, और यदि एशियाई विरोधी कोई नया विधान पेश किया तो सत्याग्रह पुनः आरम्भ कर दिया जायेगा।