मई ३० : लन्दन में लीग ऑफ ऑनरकी सभा एच० एस० एल० पोलकने दक्षिण आफ्रिकी भारतीयोंकी समस्यापर भाषण दिया।
मई ३१ : गांधीजीने जी० ए० नटेसनको पत्र लिखते हुए अस्थायी समझौतेपर सन्तोष प्रकट किया और नटेसनके कार्यकी प्रशंसा की।
जून १ : क्लार्क्सडॉर्पके भारतीयोंने बताया कि गृहमन्त्री स्वर्ण-कानून में कोई परिवर्तन नहीं कर सके।
जून २ : गांधीजीने पार्क स्टेशनपर सोढाको भारत जाते हुए विदाई दी।
अस्थायी समझौते के अन्तर्गत ५ सत्याग्रही रिहा किये गये।
दक्षिण आफ्रिका ब्रिटिश भारतीय समितिने ट्रान्सवालमें स्वर्ण कानून तथा बस्ती अधिनियम के अमल तथा भारतीयोंकी अन्य कठिनाइयोंके बारेमें उपनिवेश कार्यालयको लिखा ।
जून ३ : गांधीजीने 'इंडियन ओपिनियन' में सत्याग्रहकी सफलता पर प्रकाश डाला।
जून ५ : जोहानिसबर्ग में सत्याग्रहियोंके फुटबॉल मैचके बाद गांधीजी तथा एल० डब्ल्यु० रिचने सभा में भाषण दिये।
ब्रिटिश भारतीय संघने नगरपालिका परिषद अध्यादेशके मसविदेका विरोध करते हुए ट्रान्सवाल प्रशासक तथा प्रान्तीय परिषदको याचिका भेजी।
जून ६ : ब्रिटिश भारतीय संघने क्लार्क्सडॉर्पके भारतीयोंकी ओरसे गृह सचिवको स्वर्ण-कानूनके अमलके बारेमें लिखा।
जून ९ : गांधीजी जोहानिसबर्ग में विलियम हॉस्केनको दिये गये भोज में शामिल हुए।
जून १० : गांधीजीने 'इंडियन ओपिनियन' में लिखते हुए ट्रान्सवाल नगरपालिका परिषद अध्यादेश के मसविदेकी आलोचना की और बताया कि इसका उद्देश्य एशियाई फेरीवालोंको कुचल डालना है।
जून १५ : रूडीपूर्ट में टैम्बलिन नामक एक गोरेपर एशियाइयोंको बाड़े किरायेपर देनेके कारण मुकदमा चलाया गया।
जून १६ : डर्बन में सोराबजी शापुरजीकी विदाईके अवसरपर गांधीजीने भाषण दिया।
जून १७ : पोलकने दक्षिण आफ्रिका ब्रिटिश भारतीय समितिसे ट्रान्सवालके भारतीयोंकी शिकायतोंके बारेमें उपनिवेश कार्यालयको लिखा । उन शिकायतों में स्वर्ण-कानून, वस्ती-अधिनियम तथा भूतपूर्व गिरमिटियोंपर लगाये गये तीन पौंडी करसे उत्पन्न कष्ट भी शामिल थे।
जून १९ : नेटालके भारतीय नेताओंने टाउन क्लार्कको लिखा कि प्रजातीय भेदभाव जानेके कारण वे राज्याभिषेकसे सम्बन्धित सरकारी समारोहोंमें भाग नहीं ले सकते।
लन्दन में उपनिवेश मन्त्रीकी अध्यक्षता में इम्पीरियल कांग्रेसकी पहली बैठक।
जून २१ : गांधीजी नेटालके भारतीय नेताओंके साथ राज्याभिषेक समारोहके सम्बन्ध में डर्बनके महापौरसे मिले।
जून २२ : वेस्टमिन्स्टर ऐवेमें सम्राट् जार्ज पंचमका राज्याभिषेक हुआ। डर्बन में भारतीयों द्वारा समारोहका बहिष्कार।