जून २४ : गांधीजीने 'इंडियन ओपिनियन' में सम्राट्के प्रति अपनी राजभक्तिकी पुष्टि की।
जून २७ : भारतीय प्रवासी निकायके शिष्टमण्डलने भारतसे प्रवासके बन्द हो जानेपर अन्य मजदूरोंको उपलब्ध करनेकी समस्यापर स्मट्सके साथ बातचीत की।
सर विलियम बुलने ब्रिटिश लोकसभा में ट्रान्सवालके स्वर्ण-कानून तथा बस्ती-अधिनियमको भारतीयोंके विरुद्ध अमल में लानेके सम्बन्धमें प्रश्न पूछे।
जून ३० : सर्वोच्च न्यायालयके ट्रान्सवाल खण्डपीठने फैसला करते समय नियम बनाया कि "कोई भी भारतीय एकसे अधिक पत्नी इस देशमें न लाये और वह स्त्री वास्तव में निश्चित रूपसे उसकी पत्नी हो"।
जुलाई १ : गांधीजीने 'इंडियन ओपिनियन' में लिखते हुए इंग्लैंड में पोलक द्वारा किये गये कार्यकी प्रशंसा की।
जुलाई १ के बाद: गांधीजीने फीनिक्सकी गतिविधियोंको विस्तृत करनेके लिए डॉ० प्राणजीवन मेहताको १,००० पौंड तक की आर्थिक सहायता देनेके बारेमें लिखा।
जुलाई ४ : क्षय-रोग विरोधी कार्यके बारेमें डॉ० म्युरिसनको लिखा।
जुलाई ५ : ब्रिटिश भारतीय संघ तथा हमीदिया इस्लामिया अंजुमनके अध्यक्षोंने गृहसचिवसे लिखकर पूछा कि क्या न्यायमूर्ति वेसेल्सके निर्णयका असर मुसलमानोंको अपने मजहब द्वारा स्वीकृत एकसे अधिक पत्नियाँ लाने देनेकी वर्तमान प्रथापर भी पड़ेगा।
जुलाई ८ : गांधीजीने 'इंडियन ओपिनियन' में न्यायमूर्ति वेसेल्स द्वारा बाई रसूल तथा आदमजी इस्माइलके मामलों में दिये गये इस फैसलेपर विचार किया कि एक भारतीय एक ही पत्नी ला सकता है, और कहा कि ब्रिटिश उपनिवेशों में ऐसा कानून बनाना सम्भव नहीं जो कि एक मान्यता प्राप्त धर्मका अपमान करे।
जुलाई ११ : रूडीपूर्टमें मजिस्ट्रेटने बाड़े एशियाइयोंको किरायेपर देनेके अपराधमें टैम्बलिनको स्वर्ण-कानूनके अन्तर्गत २ पौंड जुर्माने या दो दिनको कैदकी सज़ा दी।
जुलाई १२ : ब्रिटिश लोकसभा में ट्रान्सवाल नगरपालिका अध्यादेशके मसविदेके सम्बन्ध में प्रश्न पूछे गये।
जुलाई २० : लॉर्ड ऐम्टहिल तथा सर मंचरजी मेरवानजी भावनगरीने दक्षिण आफ्रिका ब्रिटिश भारतीय समितिकी ओरसे उपनिवेशों में भारतीयोंके साथ होनेवाले बरताव तथा इम्पीरियल कान्फ्रेंसके रुखके बारेमें उपनिवेश कार्यालयको लिखा और प्रार्थना की कि जनरल बोथासे शिष्टमण्डलको भेंट देनेके बारेमें कहा जाये।
जुलाई २२ के पूर्व : स्मट्सने ब्रिटिश भारतीय संघ तथा हमीदिया इस्लामिया अंजुमनको सूचना दी कि उन्होंने मुसलमानोंकी पत्नियोंके प्रवासके बारेमें न्यायमूर्ति वेसेल्स द्वारा दिया गया निर्णय देखा है और उनके ध्यानमें लाये गये कष्टोंके मामलोंपर वे अलग-अलग विचार करेंगे।
जुलाई २६ के आसपास : दक्षिण आफ्रिका ब्रिटिश भारतीय समितिने भारतीय पत्नियोंके नेटालमें प्रवेशके बारेमें उपनिवेश कार्यालयको लिखा।
जुलाई २८ : एच० एस० एल० पोलकका लन्दनकी विश्व प्रजातीय कांग्रेस में भाषण।