पत्रपर दृढ़ रहने तथा भूतपूर्व गिरमिटिया भारतीयोंसे तीन पौंडी कर वसूल न करनेकी प्रार्थना की।
नवम्बर २५ : गांधीजीने "इंडियन ओपिनियन' में नेटालके भारतीयोंसे ३ पौंडी कर हटाने के लिए कार्यवाही करनेकी अपील की।
दिसम्बर ६ : लॉर्ड लेमिंग्टनने लॉर्ड-सभामें उपनिवेश कार्यालय तथा संघ सरकारके बीच ट्रान्सवालमें ब्रिटिश भारतीयोंकी स्थितिसे सम्बन्धित पत्र-व्यवहारको प्रस्तुत करनेका प्रस्ताव रखा; और ट्रान्सवाल स्वर्ण-aकानून, बस्ती-अधिनियम तथा नगरपालिका अध्यादेशके अमलके बारेमें सूचना देनेके लिए कहा।
दिसम्बर ७ : गांधीजीने ई० एफ० सी० लेनको लिखे पत्रमें सुझाव दिया कि यदि संघ-संसदके मौजूदा अधिवेशन में सामान्य विधान पास नहीं किया जा सकता तो ट्रान्सवाल प्रवासी प्रतिबन्धक अधिनियमको संशोधित कर देना चाहिए।
दिसम्बर ८ : पत्र द्वारा गोखलेको दक्षिण आफ्रिका आनेका पुनः निमन्त्रण दिया।
दिसम्बर १९ : 'इंडियन ओपिनियन' में लिखते हुए भारतीयोंसे अकाल सहायता कोष में मुक्त हस्त होकर चन्दा देनेकी अपील की।
दिसम्बर २० : जोहानिसबर्ग में एलेक्स बेन्सनको श्रद्धांजलि समर्पित करनेके लिए बुलाये गये चीनियोंके सम्मेलन में भाषण दिया।
दिसम्बर २१ : प्रिटोरिया से ई० एफ० सी० लेनका तार उपलब्ध; उन्होंने गांधीजी को मिलने तथा नये प्रवासी विधेयकका मसविदा देखनेके लिए आमन्त्रित किया।
दिसम्बर २२ : गांधीजीने नये संघ प्रवासी प्रतिबन्धक विधेयकका मसविदा देखा।
दिसम्बर २६ अथवा उसके बाद : भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेसके कलकत्ता अधिवेशन में एच० एस० एल० पोलक, चिन्तामणि तथा सोराबजी शापुरजीके भाषण। प्रस्तावोंमें दक्षिण आफ्रिकी भारतीयोंकी निर्योग्यताओंके बारेम अफसोस जाहिर करते हुए प्रतिशोधात्मक उपायोंकी माँग की गयी और सरकारपर जोर डाला गया कि गिरमिट प्रथाको सर्वथा बन्द कर दिया जाये। पोलकने अपने भाषणमें बताया कि आगामी वर्ष श्री गोखलेका दक्षिण आफ्रिका जानेका इरादा है।
दिसम्बर ३० : गांधीजीने 'इंडियन ओपिनियन' में अधिकारियों द्वारा नाथलिया नामक भारतीय बालकको नेटालमें प्रवेशकी अनुमति न देनेकी निन्दा की और कहा कि मामलेको उच्चतर न्यायालयों में ले जाया जाये।
१९१२
जनवरी १ : जोहानिसबर्ग में डॉ० अब्दुर्रहमानकी अध्यक्षता में आफ्रिकी राजनीतिक संगठनकी उद्घाटन सभा हुई।
जनवरी ४: ब्लूमफाँटीन में मजदूर सम्मेलनने गिरमिट प्रथाको बन्द कर देनेकी माँग की।
जनवरी ४ (?) : पोर्टरने रिपोर्ट दी कि मलय बस्ती, जोहानिसबर्ग में भयानक रूपसे चेचक फैल गया है।
जनवरी ५ : ब्रिटिश भारतीय संघने गृह-सचिवसे एक ऐसे मामलेकी शिकायत की