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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 11.pdf/६३१

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तारीखवार जीवन-वृत्तान्त

फरवरी १ : गांधीजीने ई० एफ० सी० लेनको तार देकर ३१ जनवरीके उत्तरके प्रति अपना असन्तोष व्यक्त किया और प्रार्थना की कि खण्ड ७ और ८ में परिवर्तन किये जायें। कहा कि उत्तर उपलब्ध होने तक वे सार्वजनिक कार्यवाही नहीं करेंगे।

फरवरी ३ : नये प्रवासी विधेयकके बारेमें "इंडियन ओपिनियन" में लिखते हुए बताया कि यह स्मट्सके वादेको पूरा नहीं करता। उन उपबन्धोंकी आलोचना की जो न्यायिक अपीलका अधिकार छीनकर पत्नियों और नाबालिगों के अधिवास सम्बन्धी अधिकारोंका निश्चय करनेका अधिकार प्रवासी अधिकारियोंको देते हैं तथा शिक्षित व्यक्तियोंके अन्तर्प्रान्तीय आवागमन में बाधा डालते हैं।

"इंडियन ओपिनियन" के गुजराती विभाग में नये प्रवासी विधेयकके महत्वपूर्ण खण्डोंका अनुवाद किया और उनपर टिप्पणियाँ दीं।

फरवरी ४ : नये प्रवासी विधेयकका विरोध करने के लिए केप और नेटालमें सभाएँ।

फरवरी ७ : गृह-सचिवने १ फरवरीके गांधीजीके तारके उत्तरमें लिखा कि नये विधेयकमें न्यायालयों में अपीलके अधिकारको कहींपर भी निषिद्ध नहीं किया गया। सारे संघ में अधिवास सम्बन्धी प्रमाणपत्रोंकी प्रणाली असम्भव है; ऑरेंज फ्री स्टेटमें आवश्यक हल्फिया बयान सम्बन्धी खण्ड ८ के बारेमें विचार किया जा रहा है; गांधीजी से अपील की कि वे अपने देशवासियोंको विधेयक स्वीकार करनेके लिए राजी करें।

इसके उत्तरमें गांधीजीने तार देकर माँग की कि विधेयक में संशोधन किया जाये ताकि शिक्षित एशियाइयोंके अन्तर्प्रान्तीय प्रवासके सम्बन्ध में वर्तमान अधिकार बने रहें। उत्तर उपलब्ध होनेतक सार्वजनिक कार्यवाही अब भी स्थगित रहेगी।

फरवरी ८ : स्मट्सने उत्तर दिया कि उन्हें आशा है कि वे उपर्युक्त बातोंके बारेमें सन्तोषजनक आश्वासन दे सकेंगे।

गांधीजीने तार दिया कि कमसे कम वर्तमान कानूनी स्थितिको बनाये रखनेका आश्वासन देना आवश्यक है; वे विधेयकके उन स्वरूपोंकी जो अस्थायी समझौते के अन्तर्गत नहीं आते, आलोचना करनेका अपना अधिकार सुरक्षित रखते हैं।

फरवरी ९ : सर्वोच्च न्यायालयके नेटाल खण्डपीठने मजिस्ट्रेटके इस निर्णयकी पुष्टि की कि यद्यपि एन० मुडले गिरमिटके समाप्त होनेपर ही नौकरीपर लगा है फिर भी उसे तीन पौंडी कर देना पड़ेगा।

फरवरी १० : गांधीजीने "इंडियन ओपिनियन" में एशियाइयोंका बहिष्कार करने तथा निहित अधिकारों में हस्तक्षेप करनेकी नीतिके कारण नये प्रवासी विधेयककी कटु आलोचना की। आशा व्यक्त की कि सरकार भारतीयोंके विरोधपर सहानुभूतिके साथ विचार करेगी।

फरवरी ११ : नये प्रवासी विधेयकका विरोध करनेके लिए किम्बर्लेमें भारतीयोंकी सार्वजनिक सभा।

फरवरी १२ : यूरोपसे लौटनेपर कैलेनबैकका गांधीजी द्वारा क्रूगर्सडॉर्प में स्वागत।

फरवरी १३ : ट्रान्सवाल सर्वोच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति वेसेल्सने फातिमा जसातकी वह अपील जो उन्होंने मजिस्ट्रेट द्वारा प्रवेशकी अनुमति न देनेके विरुद्ध की थी,

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