इस आधारपर खारिज कर दी कि एक मुसलमान केवल एक पत्नीको ला सकता है।
फरवरी १५ : गांधीजीने ई० एफ० सी० लेनको लिखा कि उन्हें अभीतक उत्तर नहीं मिला; वे न्यायालयों में अपील करनेके मामलेपर कानूनी सम्मति लेना चाहते हैं।
प्रवासी विधेयकके कुछ उपबन्धोंपर अपनी कानूनी राय देनेके लिए आर० ग्रेगरोवस्कीको लिखा।
ब्रिटिश भारतीय संघ तथा हमीदिया इस्लामिया अंजुमनने गृहमन्त्रीको लिखा कि फातिमा जसातके मामलेमें हस्तक्षेप न किया जाये।
फरवरी १७ के पूर्व : गांधीजीने एन० मूडलेकी अपीलके सम्बन्ध में सर्वोच्च न्यायालयके फैसलेपर 'इंडियन ओपिनियन' में टिप्पणी दी।
फरवरी १८ : सोराबजी शापुरजी भारतसे लौटे।
फरवरी १९ : लॉर्ड-सभा में लॉर्ड ऍम्टहिल द्वारा ट्रान्सवालके भारतीयोंपर बहस प्रारम्भ।
फरवरी २१ : गांधीजीने आगाखाँके प्रतिनिधिको अभ्यागत अनुमतिपत्र देनेके सम्बन्ध में एशियाई पंजीयकको तार भेजा।
फरवरी २२ : सर्वोच्च न्यायालयने बॉक्सबर्ग के बाड़ोंके सम्बन्ध में एल० डब्ल्यू० रिच और ए० एम० भायातके नाम सम्मन जारी किये।
फरवरी २४ : गांधीजीने ई० एफ० सी० लेनको पत्र द्वारा वकीलोंकी रायके बारेमें सूचना दी कि प्रवासी समाहरण विधेयकपर आदेश मिल जानेकी स्थिति के सिवा वह अन्य स्थितिमें न्यायालयोंके अधिकार क्षेत्रको समाप्त करता है और वर्तमान अधिकारोंमें से कुछको छीन लेता है; प्रार्थना की कि उक्त त्रुटियोंको दूर किया जाये।
फरवरी २७ : शाही विधान परिषद्, कलकत्तेमें गो० कृ० गोखलेने नेटालके गिरमिटिया मजदूरोंके बारेमें प्रश्न पूछे।
फरवरी २९ : ब्रिटिश भारतीय संघने फातिमा जसातके मामलेके सम्बन्धमें गृहमन्त्रीको अनुस्मारक तार भेजा।
मार्च २: गृहमन्त्रीने तार द्वारा सूचना दी कि फातिमा जसातके मामलेमें उनके हस्तक्षेपकी आवश्यकता नहीं।
मार्च ४ : अखिल भारतीय मुस्लिम लीगके कलकत्ता अधिवेशन में दक्षिण आफ्रिकाके भारतीयोंके बारेमें प्रस्ताव पास किया गया; एच० एस० एल० पोलकने भी भाषण दिया। शाही विधान परिषद्, कलकत्तामें उपनिवेशोंके लिए गिरमिटिया मजदूर भेजना सर्वथा बन्द करनेके सम्बन्ध में गोखलेका प्रस्ताव ११ मतोंसे गिर गया।
मार्च ५ : ब्रिटिश भारतीय संघने फातिमा जसातके मामले में हस्तक्षेप करनेके लिए फिरसे गृहमन्त्रीको लिखा।
मार्च ७ : शाही विधान परिषद् में गोखलेने फीडडॉर्प बस्तीसे भारतीयोंको हटाये जानेके बारेमें प्रश्न पूछे।
मार्च ९ : गांधीजीने 'इंडियन ओपिनियन' में नाथलिया नामक भारतीय नाबालिग के मामले में उपनिवेश कार्यालय द्वारा हस्तक्षेप करनेसे इनकार करनेपर अफसोस