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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 19.pdf/१६४

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१३६ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय इसी प्रसंग में मुझे एक बात याद आती है। श्री एन्ड्रयूजने जब जलियाँवाला बागके कत्लेाकी 'ग्लैकोंके कत्लेआम' के साथ तुलना की थी तब मैंने तुरन्त ही 'यंग इंडिया' में ग्लैकोंके कत्लेआमका विवरण प्रकाशित किया था। श्री एन्ड्रयूज के मन में जलियाँवाला बागके कत्लेआम के प्रति कितनी घृणाका भाव होगा, इसे व्यक्त करनेके लिए ही मैंने इसे प्रकाशित किया। लेकिन उसे एक बार फिर पढ़ जानेसे मुझे लगा कि एन्ड्रयूजने कुछ अन्याय किया है और मुझे उस सम्बन्धमें बहुत दुःख हुआ । मैं प्रिसिंपल रुद्रसे मिला; उनके साथ बातचीत की और देखा कि उनके विचार भी मेरे जैसे ही हैं। लेकिन आज मुझे श्री एन्ड्रयूजकी उस तुलनाकी यथार्थताका ध्यान आता है । जलियाँवाला बागका कत्लेआम ग्लैंकोंके कत्लेआमसे भी अधिक बुरा, अधिक निन्द्य था, ऐसा मुझे अब प्रतीत होता है। कारण कि ग्लैकोके कालके और वर्तमान कालके सुधारों में जमीन-आसमानका अन्तर है । भा० : सरकारने धर्मपर हमला किया है, ऐसा आप कैसे कहते हैं ? सरकार तो विजयी मित्र-राज्योंके बड़े मण्डलमें एक हिस्सेदार मात्र ही है । गां० : आप-जैसे व्यक्तिको आज भी ऐसा प्रश्न करते देखकर मुझे हैरानी होती है । टर्कीके नाशकी योजनायें इंग्लैंडका प्रमुख हाथ है।' ब्रिटिश प्रधान मन्त्रीको स्वयं अपनी करनीका फल चखना पड़ रहा है। वे अपने सदसद्विवेकके खिलाफ गये और फिर उसीकी तुष्टिके लिए उन्हें अपना वचनभंग' करना पड़ा; और इस प्रकार उन्होंने मुसलमानोंके हृदयोंको आघात पहुँचाया है । भा० : अच्छा, चलिये अब दूसरे विषयोंपर विचार करे। आप स्कूलोंको खाली करवा रहे हैं लेकिन उनके स्थानपर शिक्षाकी क्या कोई अन्य व्यवस्था भी कर रहे हैं ?

भा० : तब क्या वर्तमान शिक्षा प्रणाली बुरी है ? गां० : यह प्रश्न उठता ही नहीं। तथापि उसका उत्तर देने में मुझे कोई अड़चन नहीं है । मैं कहता हूँ कि "हाँ, वह बुरी है।" शिक्षाका माध्यम अंग्रेजी होने से विद्यार्थियों के दिमागपर दोहरा बोझ पड़ जाता है । में अपने विचार तो क्या कहूँ ? प्रोफेसर यदुनाथ सरकार-जैसा व्यक्ति कहता है कि इस विदेशी भाषाके माध्यम से १. सन् १६९२ में विलियम तृतीय और मैरीके शासनकालमें स्कॉटलैंडमें यह कत्लेआम हुआ था । २. सुशीलकुमार रुद्र, उस समय सेंट स्टीफेन्स कालेजके प्रिंसिपल । ३. प्रथम विश्वयुद्ध की समाप्तिपर शान्ति सन्धिके अन्तर्गत । ४. लॉयड जॉर्ज । ५. ५ जनवरी, १९१८ का; देखिए “भाषण: विद्यार्थियोंकी सभा, कलकत्तामें ", १४ दिसम्बर, १९२० की पा० टिं० १ । ६. यहाँ महादेवभाईने इतना ही लिखा है कि गांधीजीने इस प्रश्नके उत्तरमें, उस समय गुजरात में चल रहे शिक्षा आन्दोलनका विस्तृत विवरण दिया । ७. १८७०-१९५८; शिक्षाशास्त्री और इतिहासकार; कलकत्ता विश्वविद्यालयके उपकुलपति (१९२६-२८)। Gandhi Heritage Portal