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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 19.pdf/१९०

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१६२ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय मैं स्वयं तो हिन्दीको ही कांग्रेसकी भाषा बनाना चाहूँगा; परन्तु फिलहाल उसे अमलमें नहीं लाया जा सकता । [ अंग्रेजीसे ] अमृतबाजार पत्रिका, ३०-१२-१९२० ८८. भाषण : कांग्रेस चुनावोंपर' २६ दिसम्बर, १९२० श्री गांधीने ... सभी असहयोगवादियोंको समझाया कि उनकी कुछ भी शिकायतें क्यों न हों और चुनाव चाहे ठीक हुए हों या गलत, उन्हें आवेश या हिंसाका कोई प्रदर्शन नहीं करना चाहिए। यदि श्री सी० आर० दास ईमानदारीसे घोषित करें कि आज सुबह हुए चुनाव ठीक तरहसे किये गये हैं, तो मैं बंगालके असहयोगियोंसे उस निर्णयको स्वीकार कर लेनेको कहूँगा, और यदि फिर भी उन्हें कोई शिकायत हो तो में उन्हें सलाह दूंगा कि वे विषय समितिसे अलग हो जायें और कांग्रेसकी कार्यवाहि- योंमें कोई सक्रिय भाग न लें । में खुद भी उनके साथ बाहर चला जाऊँगा और उनके साथ रहूँगा । कांग्रेसके अन्दरका काम में श्री शौकत अलीके ऊपर छोड़ दूंगा । [ अंग्रेजीसे ] अमृतबाजार पत्रिका, ३०-१२-१९२० ८९. भाषण : कांग्रेस के नये सिद्धान्तपर २८ दिसम्बर, १९२० जिस प्रस्तावको प्रस्तुत करनेका गौरव मुझे प्राप्त हुआ है, वह इस प्रकार है : भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेसका उद्देश्य भारतीयों द्वारा सभी उचित और शान्तिपूर्ण उपायोंसे स्वराज्य प्राप्त करना है। में यह प्रस्ताव थोडेसे अंग्रेजी शब्दोंमें पेश करके ही अपनी बात समाप्त कर दूंगा, और आपका ज्यादा समय नहीं लूंगा। मैं उसे समझानेके दायित्व से पहले ही मुक्त हो चुका हूँ; क्योंकि लाला लाजपतराय आ गये हैं और उन्होंने आपको अंग्रेजीमें १. यह भाषण नागपुर कांग्रेसमें उस समय दिया गया था जब गांधीजीने विषय समितिके लिए प्रतिनिधियोंके सुबह हुए चुनावके सम्बन्धमें शिकायतें सुनीं । अन्तमें अध्यक्षने फिरसे चुनावोंका आदेश दिया था । २. नागपुर कांग्रेसके समय विषय समितिको बैठकमें सिद्धान्त सम्बन्धी प्रस्तावके मसविदेपर बहस शुरू होनेके अवसरपर यह भाषण दिया गया था । Gandhi Heritage Portal