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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 19.pdf/४५

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39333 भाषण: विद्यार्थियोंकी सभा, आगरा में १७ गुलामी की जंजीरकी चमकसे हमारी आँखें चौंधिया रही हैं। हम उसे अपनी स्वतन्त्रताकी निशानी मान बैठे हैं। यह हमारी अत्यन्त हीन गुलाम अवस्थाका सूचक 1

अपने भाषण में उन्होंने आगे बताया कि प्रचलित शिक्षा-पद्धति हमें कायरता सिखाती है। हमारे मनमें तिलक महाराजके प्रति चाहे कितनी ही भक्ति क्यों न हो लेकिन उस भक्ति भावनाको क्या कोई विद्यार्थी खुलकर अभिव्यक्त कर सकता है ?

हमारा जीवन ही कायरताका पर्याय बन गया है। जो तालीम हमें भयहीन नहीं बना पाती, बल्कि जो भयको पुष्ट करती है वह तालीम किस कामकी ? जिस शिक्षा में सचाईसे चलनेका अवकाश नहीं, देश-भक्तिको अवकाश नहीं, वह कैसी शिक्षा है ? लेकिन मेरा यह कहना नहीं है कि तालीम बुरी है, केवल इसीलिए उसका त्याग कर देना चाहिए; मेरा कहना यह है कि चूंकि यह तालीम हमें गुलामी में रखनेवाले लोगों द्वारा मिलती है, इसलिए हम उसे ग्रहण नहीं कर सकते। गुलामोंका मालिक हमें स्वतन्त्रताका पाठ नहीं पढ़ा सकता । इस साम्राज्यमें मलिनता आ गई है और यह राक्षसी साम्राज्य अगर मुझे स्वतन्त्रताकी तालीम देना चाहता हो तो भी मैं उसे नहीं ले सकता । यह शिक्षा चाहे कैसी भी क्यों न हो, लेकिन देखिए कि उसके मूल में क्या है ? मोटी-मोटी पुस्तकें पढ़ाई जाती हैं इससे आप लुब्ध क्यों होते हैं ? ये पुस्तकें आपको स्वतन्त्रताकी सच्ची तालीम नहीं दे सकती, केवल भरमाती हैं । वस्तुतः देखा जाये तो राष्ट्रका पैसा चुराकर हमें उससे ऐसी भूलावेमें डालनेवाली शिक्षा दी जाती है, जो चोरी करके उसमें से थोड़ेसे पैसे देकर नशाखोरी सिखाने के समान है ।

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[ बचपन में ] मैं माता-पिता के प्रति भक्ति रखनेवाला • श्रवण-जैसी भक्ति रखने- वाला लड़का था। मुझे ईश्वरमें भी विश्वास था । यह सच है कि माता-पिताके प्रति भक्ति रखनेवाला मैं आज माता-पिताकी अवज्ञा करनेको कहता हूँ । लेकिन माता- पिताको जन्म देनेवाला भी भगवान है और जहाँ ईश्वर और माता-पिताकी आज्ञा माननेमें चुनाव करना पड़े वहाँ मैं आपसे ईश्वरकी आज्ञा माननेके लिए कहता हूँ । जिनके दिलसे यह आवाज आए कि जैसा मैंने बताया है वैसे साम्राज्य द्वारा संचालित स्कूलोंमें आजादीकी शिक्षा प्राप्त नहीं की जा सकती, जिन्हें यह ईश्वरीय निर्देश प्राप्त हो कि आजादी पानके लिए इस गुलामीसे छूटना चाहिए, उन्हें माता- पिताको विनयपूर्वक समझाना चाहिए। यदि आपको यह जान पड़े कि यह घर जल रहा है और इसे तत्काल छोड़ने में ही छुटकारा है तो उसे छोड़ देना चाहिए। में तो इस साम्राज्य में पल-भर भी नहीं रह सकता, ऐसा मुझे चौबीस घण्टे महसूस होता १९-२ Gandhi Heritage Portal