टिप्पणियाँ ५६७ कताको रोकनेका शक्ति-भर प्रयास कर रहे हैं । अन्य सबसे मुझे पृथक् मानना व्यर्थ है । जो आलोचक, अली भाइयोंपर सन्देह करते ही जाते हैं, वे अपने-आपके साथ और हमारे ध्येयके साथ भारी अन्याय करते हैं । अली भाइयोंकी स्थिति बिलकुल स्पष्ट है और समझमें आने योग्य है । उनके लिए विशेष परिस्थितियोंमें हिंसा जायज है । जैसा कि मौलाना मुहम्मद अली बहुधा कहा करते हैं, युद्ध बुरा होता है, किन्तु [ संसारमें ] युद्धसे भी बदतर चीजें हैं। ब्रिटिश सरकारका अली-बन्धुओंसे ज्यादा शानदार विरोधी कोई विरला ही होगा। उनके मनमें सरकारको जबर्दस्ती नुकसान पहुँचानेकी इच्छा नहीं है । वे शान्तिपूर्ण समझौते के लिए ईमानदारी के साथ परिश्रमपूर्वक प्रयत्न कर रहे हैं । किन्तु यदि सरकारकी हठधर्मीके कारण या जनताकी ओरसे सहयोग के अभावमें, उनका प्रयत्न व्यर्थ गया, तो अपने धर्मके प्रेमी होनेके नाते, सम्भव होनेपर युद्धकी स्थिति उत्पन्न करनेमें भी वे आगापीछा नहीं करेंगे। लोग मुझे इतना सीधा-सादा न भी साथी आसानीसे भ्रमित कर सकता है। मैं समझता हूँ कि मेरे दे ही नहीं सकते। मेरा विश्वास है कि वे सब धर्म भीरु, साहसी व्यक्ति हैं, और उनके साहचर्यको मैं अपने लिए विशेष सौभाग्यकी बात मानता हूँ । जहाँतक मेरे अपने रुखका प्रश्न है, यद्यपि मेरा विश्वास मुझे हिंसात्मक युद्धको निमन्त्रण देने अथवा प्रोत्साहित करनेकी अनुमति नहीं देगा, तथापि अस्त्र-शस्त्रोंके बलपर जब- र्दस्ती लादी हुई इस स्त्रैण शान्तिकी अपेक्षा तो युद्धकी स्थितिकी कल्पना भी मैं अविच- लित भावसे कर सकता हूँ। और यही कारण है कि मैं अहिंसात्मक असहयोगके इस आन्दोलनमें यह जोखिम उठाकर भी भाग ले रहा हूँ कि इसका अन्तिम परिणाम अराजकता भी हो सकता है। असहयोग के आलोचक यदि चाहें तो प्रत्येक व्यक्तिमें अराज- कता अथवा रक्तपातको रोकनेकी उत्कट अभिलाषा देख सकते हैं। जो हो, असहयोगियों- को ठीक-ठीक समझा जाये या न समझा जाये, उनका काम धैर्य खो देनेसे चल ही नहीं सकता। उन्हें बराबर अपने निर्धारित और संकरे पथपर चलते रहना चाहिए। एक व्यक्ति, एक मत मानें कि मुझे कोई साथी मुझे धोखा तथा सम्माननीय एक यह प्रश्न उठ खड़ा हुआ है कि क्या कांग्रेसका संविधान एक व्यक्तिको एकाधिक मत देनेकी अनुमति देता है। मेरी रायमें नया संविधान 'एक व्यक्ति, एक मत 'के सिद्धान्तपर आधारित है। हमने साम्पत्तिक अर्हता हटा दी है । और मुझे लगता है कि एक व्यक्ति एकसे अधिक बहीमें अपना नाम पंजीयित नहीं करा सकता । मध्य प्रान्तमें दमन' लाला भगवानदीनजीके मुकदमेकी सुनवाई हो गई है। उनके अपनी सफाई देनेसे इनकार करनेपर, उन्हें कठिन परिश्रमके साथ अठारह महीने के कारावासकी सजा दी गई है। मैंने उनके विरुद्ध पेश अभियोगपत्र नहीं देखा है। किन्तु मैं इतना जानता हूँ कि वे नागपुर के स्वराज्य आश्रम के अधीक्षक थे, और उत्तम काम कर रहे थे । अब सरकारने अपना ध्यान अमरावतीके श्री वामनराव जोशीकी ओर लगाया है। श्री जोशी १. देखिए “भाषण: नागपुरमें ", १८-२-१९२१ । Gandhi Heritage Porta
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 19.pdf/५९५
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