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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 19.pdf/५९७

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राष्ट्रीय झंडा ५६९ है । यदि हिन्दू और मुसलमान परस्पर सहिष्णुताके साथ रह सकते हैं, तो वे दोनों अन्य सब धर्मोके प्रति सहिष्णु बने रहनेके लिए बाध्य हैं। दोनोंकी एकता भारतमें मौजूद अन्य धर्मों अथवा संसारके लिए खतरा पैदा नहीं करती । अतः मेरा सुझाव है कि पृष्ठभूमि सफेद, हरी और लाल होनी चाहिए। सफेद रंग और सब धर्मोका प्रतिनिधित्व करनेके लिए है। संख्यामें जो सबसे कम हैं, वे प्रथम स्थानमें हैं, उसके बाद इस्लामका रंग आता है, और सबके नीचे हिन्दुओंका लाल रंग है । मतलब यह है कि जो सबसे अधिक शक्ति सम्पन्न हैं, वे सबसे कम शक्तिवालोंके लिए ढालका काम करें, साथ ही सफेद रंग शुद्धि और शान्तिका भी द्योतक है । हमारा राष्ट्रीय झंडा इसका द्योतक नहीं हुआ तो व्यर्थ है । और हममें न्यूनतमकी अधिकतमके साथ बराबरी है यह दर्शाने के लिए तीनों रंगोंको बराबर-बराबर भागों में रखा गया है । किन्तु राष्ट्रके रूपमें भारत केवल चरखेके लिए ही जी या मर सकता है । प्रत्येक नारी इस बातकी गवाही देगी कि चरखेके लोपके साथ ही भारतका सुख और उसकी समृद्धि लुप्त हो गई है। चरखेके आह्वानपर भारतकी नारियों और आम जनतामें जितनी जागृति आई है उतनी पहले कभी नहीं आई थी। जनसाधारण उसे अपना जीवनदाता मानते हैं। स्त्रियां उसे अपने नारीत्वका संरक्षक मानती हैं। जिस भी विधवासे मैं मिला हूँ उसीने चरखेको अपने एक प्रिय और विस्मृत मित्र के रूपमें पहचाना है । केवल उसकी पुनः स्थापना ही लाखों क्षुधाग्रस्त लोगोंका पेट भर सकती है । औद्योगिक विकासकी कोई भी योजनाएँ १,९०० मील लम्बे और १,५०० मील चौड़े इस विशाल- भूखण्डके किसानोंकी बढ़ती हुई गरीबीकी समस्याको हल नहीं कर सकतीं। भारत कोई छोटा द्वीप नहीं है, वह एक विशाल महाद्वीप है, जिसे इंग्लैंडके समान एक औद्योगिक देशमें परिणत नहीं किया जा सकता। और हमें संसारके शोषणकी प्रत्येक योजनासे तो दृढ़ताके साथ मुँह मोड़ लेना चाहिए। देशकी सम्पदा बढ़ानेके लिए हमारी एकमात्र आशा अपनी झोंपड़ियोंमें कपासको कपड़ेमें परिणत करके, राष्ट्रके खाली समयका उपयोग करनेपर केन्द्रित होनी चाहिए । अतः चरखा भारतीय जीवनके लिए उतना ही आवश्यक है, जितने कि हवा और पानी । साथ ही मुसलमानोंका उसपर उतना ही विश्वास है जितना हिन्दुओंका । सच तो यह है कि हिन्दुओंकी अपेक्षा मुसलमान उसे अधिक तत्परताके साथ अपना रहे हैं, क्योंकि मुस्लिम महिलाएँ पर्दानशीन हैं, और अब वे अपने पतियोंकी बहुत ही कम आयमें कुछ इजाफा कर सकती हैं । अतः चरखा राष्ट्रीय जीवनका सबसे महत्वपूर्ण, साथ ही सबसे अधिक स्वाभाविक और सभी लोगोंके लिए समान रूपसे उपयोगी उपादान है । उसके माध्यम से हम सारे संसारको बतलाते हैं कि जहाँतक भोजन और कपड़ेका सवाल है, हम शेष संसारपर तनिक भी आश्रित न रहनेके लिए कृत संकल्प हैं। जिनका विश्वास मेरे विश्वाससे मिलता-जुलता है, वे शीघ्र ही अपने घरोंमें चरखेकी पैठ करायेंगे, और मेरे द्वारा सुझाये हुए नमूनेका झंडा रखेंगे । निष्कर्ष यह कि झंडा खद्दरका ही होना चाहिए; क्योंकि मोटे कपड़े के द्वारा ही हम भारतको कपड़े के मामलेमें विदेशी बाजारोंसे मुक्त कर सकेंगे। सभी धार्मिक संग- ठनोंको मेरी सलाह है कि यदि वे मेरे तर्कसे सहमत हों, तो अपने-अपने धार्मिक झंडोंमें Gandhi Heritage Portal