५७० - उदाहरणार्थ खिलाफत के सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय झंडोंमें - बाईं ओर, ऊपरके कोनेमें, एक छोटा-सा राष्ट्रीय झंडा बुन लें । विहित आकारके झंडे में पूरे आकारके चरखेका चित्र होना चाहिए । [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, १३-४-१९२१ २८१. उड़ीसा और आन्ध्र उड़ीसाकी यह मेरी पहली यात्रा थी, और १९१६ में (एक बार) बेजवाड़ा और नेलौरको छोड़कर, आन्ध्र भी मैं पहली बार ही गया था । इन प्रान्तोंके कुछ अविस्मरणीय दृश्य और संस्मरणमें लेखबद्ध करना चाहूँगा । कार्यक्रम बड़ा व्यस्त था, और मैं बड़े-बड़े मुकामोंका उल्लेख भी सरसरी तौरपर ही कर सकता हूँ । मैं जानता था कि मुझे उड़ीसामें जीवित कंकाल देखने पड़ेंगे; किन्तु हालत के इतनी बुरी होनेकी कल्पना मैंने नहीं की थी । मैंने भयावह तसवीरें देखी थीं, किन्तु यथार्थ तो उससे कहीं अधिक भयावह था । ६ मार्चके उस स्मरणीय दिन पुरीकी पवित्र नगरीकी एक सड़क के किनारे कतार बाँधकर खड़े हुए उन पुरुषों, स्त्रियों और बच्चोंके लिए स्वराज्यका क्या अर्थ हो सकता है, जिनमें हाड़ और चमड़ीके सिवाय और कुछ नहीं था । एक दो नहीं, अनेक । और जो आ नहीं सके वे अलग। ये भुखमरोंमें अपे- क्षाकृत समर्थ थे - अर्थात् ऐसे थे जो काफी दूरीसे चलकर आ सकते थे । वे जिसने उन्हें चावल भेजा था, और जिससे उन्हें और अधिक चावलकी आशा थी उसे देखने आये । कुछने रोकर करुण स्वरमें कहा 'हम भूखे हैं।' कुछ बोले, 'दाम कब घटेंगे ? ' मैं समझ गया कि बहुतोंके लिए स्वराज्यका अर्थ है सस्ता भोजन और सस्ता कपड़ा - कपड़ेसे भी ज्यादा भोजन । उनके कमरसे नीचे के अंग ढकने के लिए एक चिथड़ा काफी था; किन्तु भोजन तो चाहिए ही । मैं इस स्थलकी ओर एक बड़े बंगलेसे गया था, जहाँ मैं प्राचुर्यके बीच ठहराया गया था। मैं उस विशाल मन्दिरके पाससे कई बार निकला जिसमें जगतके नाथ विराजते हैं। रास्तेमें मुझे खूब खाये-पिये महंत और पंडे तथा सैकड़ों तीर्थयात्री मिले, जो कई सौ रुपये खर्च कर सकते थे । विषमता बहुत बड़ी थी, और मेरा दुःख तो और भी गहरा तथा तीखा था । मुझे लोग एक अनाथालयमें ले गये। एक दयालु पुलिस अधीक्षकने उसकी स्था- पना की थी। मैंने वहाँ हृष्ट-पुष्ट दिखनेवाले लड़के और लड़कियाँ देखीं - 'कुछ चरखा कात रहे थे, कुछ चटाइयाँ बुन रहे थे। सभी मांसहीन व्यक्ति ऐसा क्यों नहीं कर सकते ? तब उन्हें भिक्षापर, घरोंमें बचे हुए भोजनपर अथवा मुट्ठीभर चावलपर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा । यदि वे कताई-भर कर सकें, तो अपनी जीविका अर्जित कर सकेंगे। किन्तु उन्हें चरखे कौन देगा ? सीधा उत्तर आया, “कांग्रेस, और कौन ? " कांग्रेस उन्हें कताईके माध्यमसे स्वराज्य प्राप्त करना सिखा सकती है। ऐसा अन्य कोई धन्धा नहीं है, जिसे लाखों लोग अपना सकें, चटाई बनाना भी नहीं। क्योंकि Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 19.pdf/५९८
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