भाषण : अहमदाबादकी सार्वजनिक सभामें ५७५ हुआ जाऊँ । पंचम जातिके लोगोंने इससे पहले ब्राह्मणोंके इस गाँवमें कभी प्रवेश नहीं किया था । [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, १३-४-१९२१ २८२. भाषण : अहमदाबादको सार्वजनिक सभा में १३ अप्रैल, १९२१ गांधीजीने अपने भाषण में कहा : हम अब केवल खिलाफत और पंजाब के अन्यायोंका निराकरण करानेके लिए नहीं लड़ रहे हैं। हम ऐसा स्वराज्य लेना चाहते हैं जो राम-राज्य जैसा हो । इस राक्षसी राज्यका अर्थ तो यह है कि आतंक नीति चालू रहे और निर्बलोंका शोषण होता रहे । हम अपने राम-राज्यको आत्मशुद्धिके द्वारा प्राप्त करना चाहते हैं । सभीने राष्ट्रीय सप्ताह में यह प्रार्थना की होगी कि प्रभु हममें न्याय और दयाकी भावना उत्पन्न करे और हमें बुराईसे असहयोग करनेकी तथा हिंसा एवं क्रोधसे बचे रहनेकी शक्ति दे । जहाँतक सरकारी स्कूलों और अदालतोंके बहिष्कारका सम्बन्ध है वहाँतक हमने अपना आन्दोलन जोरसे चलाया है; किन्तु कभी-कभी रुकना आवश्यक हो जाया करता है। छात्रों और वकीलोंके लिए जो कुछ सम्भव था, वह सब हमने किया है । आर्थिक दृष्टिसे उनके लिए इससे अधिक करनेकी कोशिशका अर्थ समय नष्ट करना है। हम अब अपने शरीरकी भी सोचें; हमें उसे स्वदेशी वस्त्रोंसे ढँकना चाहिए और इसके लिए हमें सूत कातना आरम्भ कर देना चाहिए। इसमें त्यागका कोई प्रश्न ही नहीं उठता है, क्योंकि इससे भारतका साठ करोड़ रुपया प्रतिवर्ष बचता है। जबतक एक भी व्यक्ति मुझे विदेशी कपड़ा पहने दीख पड़ेगा तबतक मेरा मन इस विचारके बोझसे दबा रहेगा कि हम स्वराज्यकी आसानसे आसान शर्ततक पूरी नहीं कर रहे हैं। मैं देखता हूँ कि इस मामलेमें सबसे बड़ा दोषी गुजरात है । भारतके दूसरे भागोंमें लोगोंके सब कपड़े विदेशी नहीं होते । उनके शरीरोंपर कमसे कम कुछ चीजें तो स्वदेशी होती हैं; किन्तु गुजरातमें पोशाकके मामलेमें सन्तोषदायक शायद ही कोई बात हो । कांग्रेसने एक करोड़ रुपया इकट्ठा करनेका आदेश दिया है। यह रुपया शिष्ट मण्डलोंको [ बाहर ] भेजने और आन्दोलन चलानेमें खर्च नहीं किया जायेगा । इसका उपयोग देश के प्रत्येक घरमें चरखा चलवानेके निमित्त ही किया जायेगा । गांधीजीने अहमदाबादको डा० कानूगा जैसा वीर पुरुष पानेपर बधाई दी कि उन्होंने उपद्रवियों द्वारा पत्थर फेंके जाने और आँखमें लगने और घायल हो जानेपर भी धरना देना बन्द नहीं किया। उन्होंने कहा : ऐसी घटनाओंसे संघर्षका गौरव बहुत बढ़ जाता है । सेनापति वीरगतिको प्राप्त हो सकते हैं; हम उनकी मृत्युपर हर्ष मनायें; Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 19.pdf/६०३
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