५७६ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय किन्तु सेनाको अपनी कूच जारी रखनी चाहिए। जबतक ऐसा वीरतापूर्ण साहस न दिखाया जायेगा तबतक हमें स्वराज्य नहीं मिल सकता । अन्तमें उन्होंने गुजरातसे अपील की कि वह राष्ट्रीय कोषमें केवल अपना भाग ही न दे, अभावग्रस्त उड़ीसा के हिस्सेमें आई हुई रकम भी दे और प्रत्येक मंजिलपर अपने दोषोंको दूर करते हुए गतिके साथ आगे बढ़े । [ अंग्रेजीसे | बॉम्बे क्रॉनिकल, १९-४-१९२१ २८३. भाषण : दलित वर्ग सम्मेलन, अहमदाबाद में ' १३ अप्रैल, १९२१ श्री गांधीजीने आरम्भमें इसपर खेद प्रकट किया कि सम्मेलनमें उपस्थिति बहुत कम है।" उन्होंने कहा : इस सम्मेलनमें इतनी कम उपस्थिति देखकर इस बातमें मेरा रहा-सहा विश्वास भी जाता रहा कि ऐसे सम्मेलन सामाजिक सुधारके प्रभावकारी साधन हो सकते हैं। आप लोग मुझसे जितनी देरतक बोलनेकी आशा कर रहे हैं उससे यदि कम देर बोलूँ तो इसका कारण यही होगा कि मेरा भाषण जिन लोगोंके लिए अभिप्रेत है, वे सब लोग यहाँ नहीं हैं; यह नहीं कि इस कामके प्रति मेरा उत्साह तनिक भी ठंडा पड़ा है। मैं इस बात के लिए भी कृतज्ञ हूँ कि इस सम्मेलनकी बदौलत मुझे एक ही मंचपर अनेक मित्रोंसे भेंट करनेका आनन्द मिला। मेरे लिए आजकल ऐसे मित्रोंसे मिलना भी साधारण बात नहीं रह गई है जिनका सहयोग पाकर मैं सुख और सम्मानका अनुभव किया करता था, किन्तु जिनसे वर्तमान स्थिति- योंके कारण मैं दुर्भाग्यवश अलग हो गया हूँ। फिर भी यह हर्षकी बात है कि अस्पू- श्यता के प्रश्नपर मेरी और उनकी स्थिति एक जैसी है। अपने विषयपर आते हुए उन्होंने कहा : मुझे नहीं मालूम कि सुधारके विरोधी सज्जनोंके गले यह बात कैसे उतारूँ कि उन्होंने जो स्थिति अपनाई है वह गलत है । मैं उन लोगोंको कैसे समझाऊँ जो दलित समाजके लोगोंसे किसी प्रकारका स्पर्श भ्रष्टकारी मानते हैं और समझते हैं कि बिना स्नान किये वे उस अपवित्रतासे मुक्त नहीं हो सकते और इस प्रकार स्नानसे चूकना पाप समझते हैं? मैं तो केवल अपने हार्दिक विश्वासको ही उनके सामने प्रकट कर सकता हूँ । १. अछूतोंका यह चौथा सम्मेलन १३-१४ अप्रैलको हुआ था । २. भाषणकी रिपोर्ट में कहा गया है : " सम्मेलनमें भद्र स्त्री-पुरुष बड़ी संख्या में आये थे। सम्मेलन में भाग लेनेवालोंको गिरफ्तार किये जानेकी अफवाहके कारण अछूतोंकी उपस्थिति आशासे कम थी । " Gandhi Heritage Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 19.pdf/६०४
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