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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 19.pdf/६०८

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५८० सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय हो सकता है कि आप उनपर अविश्वास न करें ? स्वामी विवेकानन्द कहा करते थे कि अछूत पतित नहीं बल्कि हिन्दुओं द्वारा दलित हैं। और इस प्रकार उनको दलित बनाकर हिन्दू स्वयं दलित बने हैं । मेरा खयाल है कि ६ अप्रैलको मैं नेलौरमें था । मैं वहाँ अछूतोंसे मिला था और मैंने यहाँ जैसे आज प्रार्थना की है वैसे ही वहाँ भी उस दिन की थी। मैं मोक्ष प्राप्त करना अवश्य चाहता हूँ। मैं पुनर्जन्म नहीं चाहता। लेकिन यदि मेरा पुनर्जन्म हो तो वह अछूतोंके घर हो, जिससे मैं स्वयं मुक्त होने और उनको इस दुःखजनक स्थितिसे मुक्त करनेका प्रयत्न कर सकनेके उद्देश्यसे उनके दुःखों, कष्टों और उनके प्रति किये गये अपमानोंमें हिस्सेदार हो सकूं। इसलिए मैंने यह प्रार्थना की थी कि यदि मेरा पुनर्जन्म हो तो ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या शूद्रके रूपमें न होकर अतिशूद्र के रूपमें हो । आजका दिन ६ तारीख के दिनकी अपेक्षा अधिक पवित्र है । आजका दिन हजारों निर्दोष लोगोंकी हत्याकी स्मृतिसे महत्वपूर्ण हो गया है। इसलिए मैंने आज भी यही प्रार्थना की है कि यदि मैं अपनी इच्छाएँ पूरी हुए बिना मर जाऊँ, मेरे द्वारा की गई अस्पृश्योंकी सेवा अधूरी रह जाये, मेरी कल्पनाका हिन्दुत्व निर्मित न हो तो मैं उसे पूरा करनेके लिए अस्पृश्योंके घर जन्म लूँ । मुझे झाड़ने बुहारनेसे प्रेम है। मेरे आश्रममें १८ वर्षका एक ब्राह्मण लड़का है जो आश्रमके भंगीको सफाई सिखानेके उद्देश्यसे भंगीका काम कर रहा है। यह लड़का कोई सुधारक नहीं है । वह जन्मसे सनातनी है और सनातन धर्ममें ही पला-पुसा है । वह 'गीता' का पाठ नियमसे करता है और श्रद्धापूर्वक सन्ध्यावन्दन करता है। उसका संस्कृत श्लोकोंका उच्चारण मुझसे अधिक शुद्ध है । जब वह अपने मृदुल और मधुर स्वरोंमें प्रार्थना करता है तब उससे सबके मनमें प्रेमका संचार होता है। लेकिन वह अनुभव करता है कि जबतक वह पूरा भंगी नहीं बन जाता तबतक वह पूर्ण नहीं है । वह यह भी समझता है कि यदि वह आश्रमके भंगीसे अपना काम अच्छी तरह करनेको कहता है तो उसे यह काम स्वयं करके आदर्श उपस्थित करना चाहिए । आपको समझना चाहिए कि आप हिन्दू समाजकी गन्दगी दूर कर रहे हैं । इसलिए आपको अपने जीवन पवित्र बनाने हैं। आपको सफाईकी आदत डालनी चाहिए ताकि आपपर कोई भी उँगली न उठा सके। यदि आप साबुनका उपयोग नहीं कर सकते तो आप अपने शरीरको क्षारयुक्त राख या मिट्टीका उपयोग करके स्वच्छ बनायें । आपमें से कई लोगोंको शराब पीने और जुआ खेलनेकी लत है यह आपको छोड़ देनी चाहिए। आप ब्राह्मणोंकी ओर संकेत करेंगे और यह कहेंगे कि वे भी तो इन बुरा- इयोंके शिकार हैं, लेकिन वे अपवित्र नहीं माने जाते परन्तु हम माने जाते हैं । आपको हिन्दुओंसे यह न कहना चाहिए कि वे बराय मेहरबानी आपको आजाद करें। यदि हिन्दू आपको मुक्त करना चाहते हैं तो उन्हें अपने हितके लिए आपको मुक्त करना ही होगा । इसलिए आप स्वयं पवित्र और स्वच्छ रहकर उनको लज्जित करें। मेरा विश्वास १. गांधीजी ७ अप्रैल, १९२१ को नेलौर में थे । २. १३ अप्रैल, १९१९ को जलियाँवाला बाग । Gandhi Heritage Portal