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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 19.pdf/६०९

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भाषण : दलित वर्ग सम्मेलन, अहमदाबादमें ५८१ है कि हम अगले ५ महीनोंके अन्दर अपना कलुष धो बहायेंगे । यदि मेरी यह आशा पूरी नहीं हुई तो मैं यह समझँगा कि यद्यपि मेरा प्रस्ताव बुनियादी तरीकेपर सम्भव था, फिर भी मेरा अनुमान गलत था और मैं एक बार फिर कहूँगा कि मैंने अनुमान करनेमें भूल की थी । आप अपनेको हिन्दू कहनेका दावा करते हैं, आप 'भागवत' पढ़ते हैं, इसलिए यदि हिन्दू आप लोगोंपर अत्याचार करें तो आपको यह समझना चाहिए कि दोष हिन्दू धर्ममें नहीं है, बल्कि उसके अनुयायियों में हैं। आपको अपनी मुक्तिके लिए अपने आपको शुद्ध करना होगा। आपको शराबखोरी-जैसी बुरी आदतें छोड़ देनी होंगी ! से यदि आप अपनी अवस्था सुधारना चाहते हैं, यदि आप स्वराज्य लेना चाहते हैं। तो आपको अपने पैरोंपर खड़ा होना चाहिए। मुझे बम्बई में बताया गया था कि आपमें कुछ लोग असहयोग के विरोधी हैं और सोचते हैं कि आपकी मुक्ति तो ब्रिटिश सर- कारके हाथोंसे ही सम्भव है । मैं आपसे कहना चाहता हूँ कि हिन्दू धर्मको छोड़कर अन्य किसी पक्षका अनुग्रह प्राप्त करके आप अपनी शिकायतें कभी दूर नहीं करा सकेंगे । आपकी मुक्ति तो स्वयं आपके अपने ही हाथों में है । मैं समस्त देशमें अछूतोंके सम्पर्क में आया हूँ; और मैंने देखा है कि उनमें बहुतसी सम्भावनाएँ छिपी पड़ी हैं जिनका ज्ञान, मुझे ऐसा लगता है, न स्वयं उनको है और न अन्य हिन्दुओंको । उनकी बुद्धि नितान्त शुद्ध है । मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ कि आप सूत कातना और कपड़ा बुनना सीख लें और यदि आप इन दोनों कामोंको अपना धन्धा बना लेंगे तो गरीबी आपके दरवाजेपर न फटकेगी। भंगियोंके प्रति आपका जो रुख है उसके सम्बन्धमें मैंने गोधरामें जो कुछ कहा था उसे यहाँ दोहराता हूँ। मेरी समझमें नहीं आता कि आप ढेड़ों और भंगियोंके बीच भेदका समर्थन क्यों करते हैं । उनमें तो कोई भेद नहीं है । साधारण समयमें भी उनका धन्धा ऐसा ही प्रतिष्ठापूर्ण है, जैसा वकीलोंका या सरकारी नौकरोंका । आप अब थालियोंका जूठन लेना बन्द कर दें । वह साफ-सुथरी हो तो भी न लें। आप केवल अन्न, सो भी अच्छा साफ-सुथरा, ग्रहण करें, सड़ा हुआ नहीं; और वह भी केवल तब, जब वह आपको शिष्टतासे दिया जाये। यदि मैंने जो कुछ कहा है सब आप कर सके तो ४ या ५ महीनोंमें ही नहीं, बल्कि ४-५ दिनमें ही आप मुक्त हो जायेंगे । हिन्दू स्वभावतः पापी नहीं हैं - वे अज्ञानमें डूबे हुए हैं । अछूतपन इस सालमें ही मिट जाना चाहिए। मेरी दो सबसे बड़ी इच्छाएँ जिनके कारण मैं जीवित हूँ, ये हैं : अछूतोंकी मुक्ति और गायोंकी रक्षा। जब मेरी ये दोनों इच्छाएँ पूरी हो जायेंगी तभी स्वराज्य मिल जायेगा और उन्हींकी मूक्तिमें मेरा मोक्ष भी निहित है। ईश्वर आपको इतनी शक्ति प्रदान करे, जिसकी सहायतासे आप अपने मोक्षके उपायका अनुसरण कर सकें । [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, २७-४-१९२१ तथा ४-५-१९२१ १. देखिए खण्ड १४, पृष्ठ ७०-७१ । Gandhi Heritage Portal