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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 19.pdf/६१०

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परिशिष्ट परिशिष्ट १ असहयोगपर कांग्रेसका प्रस्ताव १ चूंकि कांग्रेस के विचारसे भारतकी वर्तमान सरकारने देशका विश्वास खो दिया है; और चूँकि भारतके लोग अब स्वराज्य स्थापित करनेके लिए कृतसंकल्प हैं; और चूंकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पिछले विशेष अधिवेशनसे पूर्व भारतकी जनताने जो तरीके अपनाये उन तरीकोंसे वह अपने अधिकारों और व्यक्तिगत स्वतन्त्रताको समुचित मान्यता नहीं दिला सकी और न ही अपने प्रति किये गये बहुतसे गम्भीर अन्यायों विशेषकर खिलाफत और पंजाबके सम्बन्धमें किये गये अन्यायोंका निराकरण करा सकी; 1 इसलिए यह कांग्रेस कलकत्तामें आयोजित विशेष अधिवेशन द्वारा पास किये गये अहिंसात्मक असहयोगके प्रस्तावकी पुनः पुष्टि करते हुए घोषित करती है कि अहिंसक असहयोगकी योजनाको -- जिसमें एक ओर तो सरकारसे स्वेच्छापर आधारित सारे सम्बन्ध तोड़ लेते हैं और दूसरी ओर कर देना बन्द कर देना है - पूर्णतः या उसके किसी एक हिस्सेको या एकाधिक हिस्सोंको भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस या अखिल भार- तीय कांग्रेस कमेटी द्वारा निर्धारित समयपर कार्यरूप दिया जायेगा और इस बीच देशको उसके लिए तैयार करनेकी दृष्टिसे कारगर कदम उठाते रहना चाहिए, जो निम्नलिखित हैं : (क) १६ सालसे कम उम्रके स्कूली बच्चोंके माता-पिताओं और अभि- भावकोंसे ( स्वयं बच्चोंसे नहीं) अपने बच्चोंको ऐसे स्कूलोंसे हटानेका अधिक प्रयत्न करनेको कहना चाहिए, जो सरकारी हैं या सरकारी अनुदानसे चलते हैं। या जिनपर किसी तरहका सरकारी नियन्त्रण है। साथ ही उनसे अपने बच्चों- की शिक्षाकी व्यवस्था राष्ट्रीय स्कूलोंमें करनेको कहा जाये । ऐसे स्कूलोंके अभाव में जिन अन्य तरीकोंसे इसकी व्यवस्था की जा सके उन तरीकोंसे व्यवस्था करनेको कहा जाये । (ख) १६ सालसे अधिक उम्र के विद्यार्थियोंको, अगर वे ऐसा महसूस करते हों कि जिन संस्थाओंमें उस शासन प्रणालीका आधिपत्य है जिसे समाप्त कर देनेका राष्ट्रने गम्भीर संकल्प किया है उन संस्थाओंमें शिक्षा प्राप्त करना उनकी अन्तरात्मा की आवाजके खिलाफ है तो, ऐसी संस्थाओंको जो सरकारके अधिकार या नियन्त्रणमें अथवा सरकारी अनुदानसे चलती हों, परिणामोंकी कोई १. कांग्रेसके नागपुर अधिवेशनमें ३० दिसम्बर, १९२० को पास किया गया प्रस्ताव । Gandhi Heritage Portal