५८४ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय नहीं छोड़ते तो निर्वाचक लोग ऐसे सदस्योंसे कोई राजनीतिक सेवा न माँगनेपर आग्रह रखेंगे। यह कांग्रेस पुलिस तथा सैनिकों और जनता के बीच बढ़ते सद्भावका अनुभव कर रही है, और इसे आशा है कि पुलिस तथा सैनिक लोग अपने धर्म तथा देशके मुकाबले अपने अधिकारियोंके आदेशोंको तरजीह नहीं देंगे तथा लोगोंके साथ शिष्टता और प्रेमका व्यवहार करके उनके ऊपर अबतक लगाये जा रहे इस कलंकको धो देंगे किं अपने ही लोगों की भावनाओं तथा अनुभूतियोंके लिए उनके मनमें कोई खयाल नहीं है । यह कांग्रेस सरकारी नौकरी करनेवाले सभी लोगोंसे अनुरोध करती है कि जबतक राष्ट्र अपने-अपने पद छोड़नेके लिए उनका आह्वान न करे तबतक वे जनताके साथ अपने व्यवहारमें अधिक दया और ईमानदारी बरतकर राष्ट्रके काममें सहायता पहुँचायें और सार्वजनिक सभाओं में कोई सक्रिय भाग तो न लें किन्तु खुले आम और निर्भीक होकर उनमें शामिल हों; वे खास तौरसे राष्ट्रीय आन्दोलनको खुले आम आर्थिक सहायता देकर राष्ट्रके काममें मदद पहुँचायें । यह कांग्रेस असहयोग प्रस्तावके एक अभिन्न अंगके रूपमें अहिंसापर विशेष जोर देती है और लोगोंका ध्यान इस तथ्यकी ओर आकर्षित करती है कि आपसी व्यवहारमें कर्म और वचन दोनों तरहसे, अहिंसा बरतना उतना ही जरूरी है जितना कि सरकारके साथ अपने व्यवहारमें; और इस कांग्रेसका विचार है कि हिंसाकी भावना न केवल लोकतन्त्रकी सच्ची भावनाके विकासके विरुद्ध है, बल्कि वस्तुतः ( जरूरत पड़नेपर) असह्योगकी किन्हीं अन्य अवस्थाओंको लागू करनेके मार्ग में भी बाधक है । अन्तमें, खिलाफत और पंजाबके साथ किये गये अन्यायोंका निराकरण कराने और 'एक वर्षके भीतर स्वराज्य स्थापित करनेके' उद्देश्यसे यह कांग्रेस सभी सार्वजनिक संस्थाओंसे, चाहे वे कांग्रेससे सम्बद्ध हों या न हों, अनुरोध करती है कि वे सरकारके साथ अहिंसक व्यवहार और असहयोगको ही बढ़ावा देनेपर अपना ध्यान केन्द्रित करें, तथा चूँकि असहयोग आन्दोलन लोगोंके बीचमें परस्पर पूर्ण सहयोग रहनेपर ही सफल हो सकता है, इसलिए यह कांग्रेस सभी सार्वजनिक संगठनोंको हिन्दू-मुस्लिम एकताको बढ़ावा देनेके लिए आमन्त्रित करती है तथा इस कांग्रेसके सभी हिन्दू प्रतिनिधि प्रमुख हिन्दुओंको ब्राह्मणों और अब्राह्मणोंके बीच जहाँ-कहीं भी विवाद हो वहाँ उसे निपटा देनेके लिए और हिन्दू धर्मके माथेपर लगे अस्पृश्यताके कलंकको धो डालने के लिए आमन्त्रित करते हैं और धार्मिक अगुओंसे अनुरोध करते हैं कि दलित वर्गोंके प्रति किये जानेवाले व्यवहारके मामलेमें हिन्दू धर्मको सुधारनेकी बढ़ती हुई इच्छाको कार्यरूप देनेमें वे अपना योगदान करें । [ अंग्रेजीसे ] भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेसके ३५ वें अधिवेशनकी रिपोर्ट । Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 19.pdf/६१२
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