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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 19.pdf/६१३

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सज्जनो, परिशिष्ट २ खिलाफतपर वाइसरायका भाषण १ आजकी इस सन्ध्या-बेलामें आपसे मिलनेका सौभाग्य प्राप्त कर मैं बहुत प्रसन्न हूँ और साथ ही इस बात के लिए भी मुझे प्रसन्नता हो रही है कि वर्तमान परिस्थितियोंके सम्बन्धमें मुस्लिम समाजकी ओरसे एक और प्रार्थनापत्र मेरे सामने प्रस्तुत किया गया है। आपको यह याद दिलानेकी जरूरत नहीं, हालांकि यह शायद याद दिला देने लायक बात है, कि मैं और मेरी सरकार आपकी माँगें महामहिमकी सरकारके ध्यानमें बार-बार लाती रही है । इस सवालपर यूरोपमें जो शान्ति सम्मेलन होते रहे हैं, उनके सामने भी हम आपकी बातें रखते रहे हैं। क्या आपको यह स्मरण करा दूं कि शान्ति सम्मेलनकी प्रारम्भिक अवस्थाओंमें भारत मन्त्रीने तथा जो दो सज्जन उस समय शान्ति सम्मेलनमें भारतका प्रतिनिधित्व कर रहे थे, उन्होंने आपके पक्षकी बड़ी जबरदस्त वकालत की। ये दो सज्जन थे, लॉर्ड सिन्हा और बीकानेरके महाराजा । चूंकि इन सज्जनोंको आपके समाजके प्रतिनिधि नहीं कहा जा सकता था इसलिए मैंने कुछ अन्य सज्जनोंसे भी शान्ति सम्मेलनमें जाकर मुसलमानोंके पक्षकी वकालत करनेको कहा। ये थे --महा- विभव आगाखाँ, श्री आफताब अहमद और श्री युसुफ अली । इनकी बात सुनी भी गई । मैंने सिर्फ इतना ही नहीं किया है, बल्कि आपके समाजके किसी भी हिस्सेने मेरे पास जो भी प्रार्थनापत्र भेजा है प्रत्येकको मैं भारत मन्त्रीके पास भेजता रहा हूँ। और न केवल अपनी सरकारके दफ्तरी कागज-पत्रोंके सहारे, बल्कि स्वयं तार भेजकर भी ऐसे प्रत्येक प्रार्थनापत्र में कही गई बातोंका हम समर्थन करते रहे हैं। इस प्रकार मैं आपको भरोसा दिलाता हूँ कि शुरूसे लेकर आखिरतक और जब असहयोग आन्दोलन प्रारम्भ हुआ उससे भी पहलेसे सरकारके रूपमें हम सब और उस सरकारके प्रमुखके रूपमें मैं आपकी माँगोंका जोरदार समर्थन करता आया हूँ - और समर्थन सिर्फ महामहिमकी सरकारके सामने ही नहीं, बल्कि शान्ति सम्मेलनके समक्ष भी । आपके पक्षको न केवल पर्याप्त रूपसे, बल्कि इस तरहसे पेश किया जा सके, जिससे आपको सन्तोष हो, इस दृष्टिसे हम कुछ भी उठा नहीं रखें, ऐसा सोचकर हमने अनौपचारिक तौरपर कुछ सज्जनोंसे फिर कहा है कि वे आपका पक्ष प्रस्तुत करनेके लिए यूरोप जायें । ये सज्जन हैं -- महाविभव आगा खाँ, श्री हसन इमाम और श्री छोटानी । श्री छोटानीके सचिवकी हैसियतसे डा० अन्सारी भी उनके साथ जायेंगे । १. यह भाषण २४ फरवरी, १९२१ को कलकत्ता में बंगाल विधान-मण्डलके निर्वाचित मुस्लिम सदस्योंके एक शिष्टमण्डलके सामने दिया गया था । सदस्योंने टर्कीको शान्ति सन्धिकी शर्तोंमें परिवर्तन करनेकी माँग की थी । Gandhi Heritage Portal