५८६ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय मेरा खयाल है, हमने जो कुछ किया है और करनेका प्रयत्न किया है, उसके इस वृत्तान्तसे आपको यह प्रतीति हो जानी चाहिए और मुझे आशा है कि आपको ऐसी प्रतीति हो जायेगी कि आपके पक्षका समर्थन करनेके लिए हमने अपने तई कुछ भी उठा नहीं रखा है। इस समय लन्दनमें क्या हो रहा है, यह मुझे मालूम नहीं है । जो सम्मेलन आदि हो रहे हैं उनके सम्बन्धमें भी मुझे न तो सरकारी तौरपर कोई जान- कारी मिली है और न निजी तौरपर ही; लेकिन मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि आरम्भसे अन्ततक हमने आपके पक्षका समर्थन किया है और उसके लिए हम इस तरह लड़े हैं कि हमने बड़ी सरकारको जो पत्रादि लिखे हैं उन्हें आपके सामने रखने में मुझे अगर स्वतंत्रता होती तो प्रत्येक व्यक्ति उन्हें देखकर सन्तुष्ट हो जाता । अन्तमें एक बार फिर मैं आपके प्रति अपनी सहानुभूति प्रकट करना चाहता हूँ और कहना चाहता हूँ कि आपके प्रार्थनापत्रोंके पक्षमें मैं जो कुछ भी कर सकता हूँ, अन्ततक वह सब करनेको कृत-संकल्प हूँ । [ अंग्रेजीसे ] स्पीचेज बाई लॉर्ड चेम्सफोर्ड, खण्ड २, पृष्ठ ५८०-८१ परिशिष्ट ३ असहयोगपर वाइसरायका भाषण १ अध्यक्ष महोदय और सज्जनो, यह चौथा अवसर है जब मुझे कलकत्ता क्लबके आतिथ्यका सौभाग्य प्राप्त हुआ है । इस पाँच सालकी अवधिकी समाप्तिपर किसी भी व्यक्तिके लिए पीछे मुड़कर इस बातपर विचार करना स्वाभाविक ही है कि उसने जो कुछ किया उसमें क्या गल- तियाँ कीं और करने लायक कौनसे कार्य न करके उसने भूलें कीं । सो इस तरह विचार करते हुए मुझे खेदके साथ कहना पड़ता है कि १९१७ में जब आपने कृपा करके मुझे अपना अतिथि बननेको निमन्त्रित किया था, उस समय श्री मॉन्टग्युके साथ मैं जो काम कर रहा था उसमें व्यस्त रहनेके कारण मैं आपका कृपापूर्ण निमन्त्रण स्वीकार नहीं कर सका। अगर उस समय मैंने आपका निमन्त्रण स्वीकार कर लिया होता तो आज यह कह सकता कि मैं जिस वर्ष भी कलकत्ता आया, हर वर्ष आपके आतिथ्यका सौभाग्य प्राप्त किया। मुझे आशा है कि आप मेरे उत्तराधिकारीको भी इसी तरह अपने आतिथ्यका सौभाग्य प्रदान करते रहेंगे, क्योंकि मैं नहीं समझता कि वाइसरायको प्रमुख प्रतिष्ठित लोगोंके सम्पर्कमें तथा ऐसे लोगोंको वाइसरायके सम्पर्क में लानेका इन वार्षिक भोजोंसे अच्छा तरीका कोई और भी हो सकता है। अप्रैल १. यह भाषण लॉर्ड चेम्सफोर्डने २३-२-१९२१ को अपने सम्मानमें कलकत्ता क्लब में दिये गये भोजके अवसरपर दिया था । Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 19.pdf/६१४
दिखावट