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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 19.pdf/६१५

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परिशिष्ट ५८७ १९१६ में वाइसरायका कार्य-भार सँभालनेपर मैं अनौपचारिक तौरपर थोड़ी देरके लिए कलकत्ता आया था, लेकिन जैसा कि मैंने उस समय भी कहा था, मेरी यात्राका उद्देश्य इस पुरानी राजधानीमें अपना आगमन-भर सूचित कर देना था । और आज जब मैं आपसे बिदाई लेने आया हूँ, तब भी मेरे लिए ज्यादा समय देना सम्भव नहीं हुआ है। फिर भी मैं आशा करता हूँ कि आप महानुभावोंने, जो कलकत्ताके हैं, मेरे बार- बार कलकत्ता आनेसे अवश्य यह अनुभव किया होगा कि आपका यह महान नगर मुझे कितना पसन्द है, और आप इस बातका भी अनुभव करते होंगे कि जिस तरह मेरे पूर्ववर्ती वाइसराय आपके बीच रहे, उस तरह मैं न ह सका, इसका मुझे कितना दुःख है । अब जब मैं पीछे मुड़कर गत पाँच वर्षोंकी अवधिकी ओर देखता हूँ तो अनुभव करता हूँ कि इस बीच काफी बड़े परिवर्तन हुए हैं। एक पुरानी लैटिन कहावत है कि जो समुद्र पार करता है - अपना देश छोड़ता है, वह अपना आकाश तो बदल लेता है, लेकिन दिमाग नहीं बदलता । मैं खुद नहीं मानता कि जब कविने ऐसा लिखा; उन दिनों भी यह बात सच रही होगी, क्योंकि जिन लोगोंको एक बदले परिवेशमें जाना पड़ता है उन लोगोंके दिमागपर परिवेश बहुत अधिक प्रभाव डालता है । हाँ, यह सिद्धान्त बेशक उन लोगोंपर लागू नहीं होता जो संसद भवनमें विरोधी दल- का स्थान छोड़कर मन्त्रियोंके स्थान ग्रहण करते हैं, क्योंकि उस हालतमें स्वभावतः वे पहली बार आलोचककी भूमिका छोड़कर आलोचनाके पात्रोंकी भूमिका सँभालते हैं । यह बात सभी स्थानोंकी संसदीय संस्थाओंकी एक सहज विशेषता है, लेकिन यह अनिवार्य है कि इस तरह जो आदमी पहली बार सरकारकी किसी कार्रवाईके कारणोंसे परिचय प्राप्त करता है, वह सरकारकी कार्रवाईका औचित्य उन दिनोंकी अपेक्षा अधिक देख सकता है जब वह तथ्योंसे उतनी अच्छी तरह अवगत नहीं था और जब उसमें यह सोचनेकी प्रवृत्ति थी कि सरकार जो करती है, वह ठीक हो ही नहीं सकता । आपके क्लबके आतिथ्यका सौभाग्य प्राप्त करनेका मेरे लिए यह अन्तिम अवसर है । फिर भी, आज हम जिस उथल-पुथलकी स्थितिसे गुजर रहे हैं, उसके सम्बन्धमें अगर कुछ कहूँ तो आप क्षमा करेंगे । आजकी रात जो आप यहाँ मौजूद हैं, मेरा खयाल है इस तथ्यको मैं इस बातका द्योतक मान सकता हूँ कि आप सरकार के साथ सहयोग कर रहे हैं। आजकल केवल हमारे भारत देशमें ही अशान्ति नहीं छाई है। सच तो यह है कि दुनियामें आप जिधर भी नजर उठाकर देखिये सर्वत्र अशांति ही छाई हुई है । लेकिन तब आप स्वभावत: ऐसा पूछ सकते हैं: हाँ, यह तो माना कि सर्वत्र अशान्ति है, लेकिन वर्तमान स्थितिके सम्बन्धमें आपकी नीति क्या है? मुझे यह स्थिति जैसी दिख रही है, उसका वर्णन में अब संक्षेपमें कर दूं । मेरा खयाल है कि जिन लोगोंने सरकार के साथ सहयोग करनेसे इनकार कर दिया है ऐसा उन्होंने मोटे तौरपर इस कारण किया है कि वे मानते हैं कि मैं और मेरी सरकार -- दोनों शैतानी है । लेकिन मुझे खुशी है कि मुझमें अब भी हास्यकी वृत्ति शेष है। मेरे कार्यकालमें मेरे लिए बहुत-से विशेषणोंका प्रयोग किया गया है, लेकिन “शैतानी" विशेषणसे तो एक नई ही चीज सामने आती है। इस विशेषणसे जुड़ी विशेषताओंको मैं अपने लिए Gandhi Heritage Portal