परिशिष्ट ५८९ इतनी तबाही हुई कि मेरा खयाल है, अब कभी ऐसी कोशिश की जानेकी गुंजाइश नहीं रह गई है । भावुक लड़कोंको स्कूल छोड़नेको प्रेरित करनेमें इस आन्दोलनको कुछ समय के लिए सफलता अवश्य मिली, लेकिन यहाँ भी इस भावुकताकी लहरके समाप्त होते ही विद्यार्थी बहुत बड़ी संख्यामें अपनी-अपनी कक्षाओंमें वापस पहुँच गये हैं। इसलिए हमने जो नीति अपनाई है, उसकी सफलताके सम्बन्धमें भरोसा रखनेका हर कारण हमारे सामने मौजूद है। लेकिन वर्गोंके बीच, विशेषकर शिक्षित वर्गोंके बीच विफल होकर असहयोगी अब अपना ध्यान सर्व साधारणपर केन्द्रित कर रहे हैं। लेकिन हमें यहाँ भी सर्वसाधारणको सही रास्ता दिखानेके लिए संगठित प्रयास करना है । वर्तमान समस्याका एक और भी पहलू है, जो मुसलमानोंसे सम्बन्धित है । टर्कीकी शान्ति सन्धिकी शर्तोंपर गौर करनेके लिए जो सम्मेलन होते रहे हैं, उनके सामने मुसलमानों के विचारों और भावनाओंको लाने के लिए मैंने जितनी कोशिश की है, उससे अधिक कोई नहीं कर सकता, और टर्कीकी शान्ति सन्धिकी शर्तोंके प्रति मैंने जितनी नापसन्दगी जाहिर की है, उतनी और कोई नहीं कर सकता -- शायद कोई मुसलमान भी नहीं। इसलिए मेरा कहना है कि जो मुसलमान टर्कीकी शान्ति सन्धि- की शर्तोंसे नाराज होकर असहयोग आन्दोलनमें शामिल हो गये हैं, उनके प्रति विशेष प्रेम-भाव और सहानुभूतिसे पेश आनेका हर कारण हमारे सामने मौजूद है। लेकिन कोई घड़ी हमारी ऐसी भी आ सकती है जब हमारी नीति विफल हो जाये, और हमारे सामने दो ही विकल्प रह जायें या तो व्यवस्था बनाये रखें या अराजकता फैल जाने दें। ऐसी हालतमें सरकारके सामने तो एक ही रास्ता होगा कि वह व्यवस्थाके पक्षमें कार्रवाई करे। तब हम सभी जिम्मेदार लोगोंको व्यवस्थाके पक्षमें खड़े होने को कहेंगे और मुझे पूरा विश्वास है कि इसमें नई परिषदें एक सक्रिय भूमि- का निभायेंगी । सरकारकी हैसियतसे हम सारे तथ्य उनके सामने पेश कर देंगे, कुछ भी छिपा कर नहीं रखेंगे। और मुझे विश्वास है कि जब हम यह सिद्ध कर देंगे कि ऐसी स्थिति आ गई है कि चुनाव सिर्फ व्यवस्था और अराजकताके बीच ही करना है तो उसकी एक ही प्रतिक्रिया होगी ; वह यह कि " आप देशमें व्यवस्था कायम रखनेके लिए जो भी कदम उठाना आवश्यक समझेंगे, उसमें हम आपका समर्थन करेंगे । कलकत्ताकी मेरी यह अन्तिम यात्रा है, और मुझे लॉर्ड रोनाल्डशे तथा उनके सहयो- गियोंके प्रति भी अवश्य ही आभार प्रकट करना चाहिए । बंगाल सरकारने मेरी सर- कारके साथ जिस वफादारीसे सहयोग दिया है, उसके लिए भी मैं आभारी हूँ । उसके प्रशासनमें जैसी बुद्धिमत्ता तथा सूझ-बूझ प्रकट होती है वह भी ध्यान देने योग्य बात है और लॉर्ड रोनाल्डशेका मेरे प्रति जैसा मैत्री भाव रहा है, उन्होंने मुझे जैसा सहयोग दिया है, उसके लिए मैं उन्हें व्यक्तिगत रूपसे धन्यवाद देता हूँ। हमारे बीच समय-समय- पर मतभेद भी हुए होंगे, किन्तु इन मतभेदोंसे वफादारी-भरे सहयोगकी उस आम नीतिके महत्वमें कोई कमी नहीं हुई, जिस नीतिका अनुभव लॉर्ड रोनाल्डशे और उनके सहयोगी मुझे बराबर कराते रहे हैं । [ अंग्रेजीसे ] स्पीवेज बाई लॉर्ड चेम्सफोर्ड, खण्ड २, पृष्ठ ५७४-८१ Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 19.pdf/६१७
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