________________
भाषण : बम्बई में शराब-बन्दीपर ३६५ ३२ करोड़ लोगोंको उनके कर्तव्यका आदेश देना सम्भव नहीं है । मैं तो केवल सलाह दे सकता हूँ और रास्ता दिखा सकता हूँ। इस बीच शराबके व्यापारियोंका यह कर्त्तव्य है कि उनको जो-कुछ सोचना-विचारना हो वे सोच-विचार लें और यह देखें कि क्या वे कोई दूसरा धन्धा हाथमें ले सकते हैं और शराबका विक्रय बन्द कर सकते हैं । धारवाड़की घटनासे उनके द्वारा बेची जानेवाली शराबमें निर्दोष लोगोंका खून मिल गया है। मेरा यह पक्का विश्वास है कि धारवाड़के धरना देनेवालोंने कुछ नहीं किया था; उन्होंने मारपीट नहीं की थी; उनपर जो आरोप लगाये गये हैं वे निरा- धार हैं और मुझे बखूबी मालूम है कि पुलिसने शराब के ठेकेदारोंको तरह दी थी, इसलिए मैं शराबके व्यापारियोंकी भी इतनी ही जिम्मेदारी समझता हूँ जितनी इन अधिकारियोंकी । पारसी समाज में सज्जनता है, ज्ञान और साहस है, इस कारण में उससे बड़े-बड़े कामों की अपेक्षा रखता हूँ। धारवाड़ में एक उद्धत कलेक्टरने क्या-क्या किया है, सो हम जानते हैं। मुझे विश्वास है कि मेरे सामने जो उद्देश्य है वह धरनेसे अवश्य पूरा होगा; किन्तु यदि सम्भव हो तो मैं यह चाहता हूँ कि वह उसके बिना ही प्राप्त किया जा सके। मुझसे ठेकेदार लोग कहेंगे कि वे अपने लाइसेंसोंका रुपया सरकारको दे चुके हैं। आपने सरकारको जो-कुछ दिया है वह आप उससे आसानीके साथ वापस ले सकते हैं। आपने जो रुपया दिया है यदि उसे आप सब वापस लेनेका इरादा कर लें तो मुझे निश्चय है कि आप उसे वापस ले सकते हैं । आप सरकारको दस्त दे सकते हैं कि आपका रुपया आपको लौटा दिया जाये, क्योंकि आप असह- योगी नहीं हैं; और यदि आपको इसमें सफलता न मिले तो आप अन्य उपायोंका आश्रय ले सकते हैं। यदि भारतको सितम्बर या दिसम्बर तक भी स्वराज्य न मिले तो आप यह समझ लें कि आपने सरकारको जो रुपया दिया है वह भावी सरकारके पास आपके नाम जमा रहेगा । मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि आपका रुपया कदापि नहीं मारा जायेगा । लेकिन आखिर क्या आप लोग इतने गरीब हैं कि आप इस रुपयेका मारा जाना बरदाश्त नहीं कर सकते ? मुझे अभी पिछले दिनों एक पारसी शराब-विक्रेताका पत्र मिला है उसमें कहा गया है कि आप लोगोंको जितना गरीब बतानेका प्रयत्न किया जाता है आप उतने गरीब नहीं हैं। पारसी विधवाएँ भी गरीब नहीं हैं; उनके पास बहुत रुपया है और मेरा भी यही विश्वास है । में अपनी निजी जानकारीके बलपर कहता हूँ कि आप गरीब नहीं है और यदि आप शराब बेचना बन्द कर देते हैं तो आप असहाय नहीं हो जायेंगे। में आपसे कहता हूँ कि आप डरपोक न बनें और परिणामोंसे भयभीत न हों; बल्कि साहसी स्त्री-पुरुषोंकी तरह तनकर खड़े हों। मैं चाहता हूँ कि पारसी लोग समानताके दर्जे की मांग करने में राष्ट्रके साथ रहें। किसी तरह की हीनताका दर्जा अब उन्हें बरदाश्त नहीं करना चाहिए। मुझसे कुछ लोगोंने Gandhi Heritage Portal